काशी, मथुरा, आगरा और धार, कहीं एक पक्ष को लगा झटका तो कहीं दूसरे को फटकार, 4 बड़े केस की सुनवाई की पूरी जानकारी

काशी, मथुरा, आगरा और धार, कहीं एक पक्ष को लगा झटका तो कहीं दूसरे को फटकार, 4 बड़े केस की सुनवाई की पूरी जानकारी
Prabhasakshi

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में इलाहबाद हाईकोर्ट ने आज अहम निर्देश देते हुए अधिकतम 4 महीने में सभी अर्जियों का निपटारा करने की बात कही है। जबकि वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद केस में सर्वे पर आज कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया व मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी की मंजूरी दी।

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर विवाद, वाराणसी में ज्ञानवापी केस, ताजमहल पर भी आज सुनवाई हुई है। इसके साथ ही एमपी के भोजशाला विवाद को लेकर भी नोटिस जारी किया गया है। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में इलाहबाद हाईकोर्ट ने आज अहम निर्देश देते हुए अधिकतम 4 महीने में सभी अर्जियों का निपटारा करने की बात कही है। जबकि वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद केस में सर्वे पर आज कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया व मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी की मंजूरी देते हुए कोर्ट ने 17 मई तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। ताजमहल केस में भी आज का दिन बेहद अहम रहा। इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 22 कमरों को खोलने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। 

श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद

श्रीकृष्ण जन्मभूमि वाद के वादी में से एक ने सोमवार को एक स्थानीय अदालत से शाही मस्जिद ईदगाह में हिंदू मंदिर के निशान की पुष्टि के लिए एक अधिवक्ता आयुक्त (कोर्ट कमिश्नर) नियुक्त करने का अनुरोध किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा कोर्ट को निर्देश दिया है कि अधिकतम 4 महीने में सभी अर्जियों का निपटारा किया जाए. साथ ही हाईकोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड व अन्य पक्षकारों के सुनवाई में शामिल ना होने पर एकपक्षीय आदेश जारी करने का निर्देश भी दिया है. भगवान श्री कृष्ण विराजमान के वाद मित्र मनीष यादव की अर्जी पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद पर मथुरा की सेशन कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है. कोर्ट ने इस मामले में 19 मई तक फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इसे भी पढ़ें: Breaking: वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे को लेकर आया बड़ा फैसला, होगी वीडियोग्राफी, नहीं बदले जाएंगे कोर्ट कमिश्नर

ज्ञानवापी मामले में फिर से होगी वीडियोग्राफी

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामले को लेकर कोर्ट का फैसला आ गया। स्थानीय कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे के लिए 17 मई तक का समय दिया। वाराणसी कोर्ट ने 17 मई तक रिपोर्ट मांगी है। साथ ही कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि कोर्ट कमिश्नर नहीं हटाए जाएंगे। कोर्ट कमिश्नर के साथ दो वकील भी होंगे। अदालत ने साथ ही पूरे मस्जिद परिसर का सर्वे करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जबतक मस्जिद के कमिशन की कार्रवाई पूरी नहीं होती है तबतक सर्वे जारी रहेगा। कोर्ट ने इस कार्रवाई को सख्ती के साथ पूरी करने का आदेश दिया है। अगर कार्रवाई में कोई विरोध करता है तो उस पर एफआईआर करने के आदेश दिए हैं।

इसे भी पढ़ें: उद्धव ठाकरे के लिए ये क्या बोल गईं नवनीत राणा? शिवसेना के भ्रष्ट शासन को उखाड़ने के लिए करेंगी काम

भोजशाला विवाद में केंद्र-राज्य और एएसआई को नोटिस

मध्य प्रदेश का भोजशाला का पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की तरफ से ऐतिहासिक धार शहर की भोजशाला पर हिंदू पक्ष के दावे को लेकर केंद्र और राज्य की सरकारों के साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इसके साथ ही उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विवेक रुसिया और न्यायमूर्ति अमरनाथ केशरवानी ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस नामक संगठन और हिन्दू पक्ष के अन्य लोगों की ओर से दायर दो जनहित याचिकाओं को सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए नोटिस जारी किए। अदालत ने धार के भोजशाला परिसर की मस्जिद से जुड़ी मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 

ताजमहल के 22 कमरों को खोलने की याचिका

इलाहबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने ताजमहल के इतिहास के बारे में सच को सामने लाने के लिए तथ्यों की जानकारी करने वाली कमेटी के गठन और ताज परिसर में स्थित 22 कमरों को खोले जाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दिया और कहा कि इसमें याचिकाकर्ता यह बताने में विफल रहा कि उसके कौन से कानूनी या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। न्यायमूर्ति डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने याचिका पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अदालत भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ऐसा आदेश पारित नहीं कर सकती है। पीठ ने याचिकाकर्ता रजनीश सिंह के अधिवक्ता रुद्र विक्रम सिंह की बिना कानूनी प्रावधानों के याचिका दायर करने के लिए खिंचाई की। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई थी और कहा था कि इस मुद्दे पर रिसर्च करो, इसके लिए एमए, पीएचडी करो, कोई न करने दे तो हमारे पास आओ। याचिकाकर्ता के वकील रुद्र विक्रम सिंह ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट में आदेश को चुनौती देंगे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले हम इतिहास विभाग और एएसआई से संपर्क करेंगे।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।