Kerala High Court ने नशे में गाड़ी चलाने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने का दिया सख्त निर्देश

केरल उच्च न्यायालय ने मोटर वाहन विभाग को शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों के लाइसेंस रद्द करने के अधिकार का कड़ाई से इस्तेमाल करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागाथ ने कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण कानून का असर घट रहा है और जानलेवा हादसे बढ़ रहे हैं। अदालत ने परिवहन आयुक्त को ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
कोच्चि, पांच नवंबर केरल उच्च न्यायालय ने नशे में गाड़ी चलाते पाए जाने वाले लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू करने में मोटर वाहन विभाग (एमवीडी) की अनिच्छा पर चिंता जताई है। अदालत ने राज्य में लगातार हो रही जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनजर ऐसे मामलों में मोटर वाहन विभाग को अपनी इस शक्ति का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागाथ ने कहा कि अधिकारियों की ऐसी अनिच्छा कानूनी प्रावधानों के उस असर को भी कम कर देती है जिसका मकसद लोगों को गलत काम करने से रोकना है।
अदालत ने कहा, ‘‘कानूनी प्रावधानों और अदालती निर्देशों के बावजूद ऐसा लगता है कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 19 के तहत ड्राइविंग लाइसेंस अयोग्य घोषित करने या रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल बहुत कम किया जाता है। अधिकारियों की यह अनिच्छा इस प्रावधान के पीछे विधायिका की मंशा को कमजोर करती है और इसके निवारक प्रभाव को कम करती है।’’ अदालत ने कहा, ‘‘शराब पीकर वाहन चलाने की घटनाओं के कारण लगातार लोगों की जान जा रही है और परिवार तबाह हो रहे हैं, ऐसे समय में यह बहुत जरूरी है कि अधिकारी मोटर वाहन अधिनियम की धारा 19 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल उतनी ही गंभीरता से करें, जितनी कि इस स्थिति में जरूरत है।’’ अदालत ने कहा कि इस प्रावधान को सख्ती से लागू करने से न केवल जवाबदेही तय होगी बल्कि यह सार्वजनिक सड़कों पर गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक व्यवहार करने वालों के खिलाफ एक कड़े निवारक के रूप में भी काम करेगा। अदालत ने परिवहन आयुक्त को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि नशे की हालत में गाड़ी चलाने से जुड़े मामलों में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 19 के तहत तुरंत और प्रभावी कार्रवाई की जाए।
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