आरोप तय करने पर राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई, लालू परिवार की बढ़ सकती है मुसीबतें

PMLA
ANI
अभिनय आकाश । Sep 30 2026 1:14PM

राउज़ एवेन्यू कोर्ट नौकरी के बदले ज़मीन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर आरोप तय करने के लिए 14 और 15 अक्टूबर को नई दलीलें सुनेगी। पूर्व जज के तबादले के बाद अब स्पेशल जज प्रशांत कुमार यह सुनवाई करेंगे। यह मामला रेल मंत्री रहते नौकरी देने के बदले ज़मीन लेने के आरोपों से जुड़ा है।

राउज़ एवेन्यू कोर्ट, पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव और कई अन्य लोगों से जुड़े कथित 'नौकरी के बदले ज़मीन' वाले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने पर नए सिरे से दलीलें सुनेगी। अब इस मामले की सुनवाई स्पेशल जज प्रशांत कुमार करेंगे और आरोप तय करने पर दलीलें 14 और 15 अक्टूबर को सुनी जाएंगी। यह नई सुनवाई इसलिए ज़रूरी हो गई क्योंकि इस मामले में आदेश सुरक्षित रखने वाले पूर्व स्पेशल जज विशाल गोगने का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट में हो गया था। दिल्ली हाई कोर्ट की मौजूदा रजिस्ट्रार सूची के अनुसार, डॉ विशाल गोगने 22 सितंबर, 2026 से रजिस्ट्रार के तौर पर कार्यरत हैं। 

इसे भी पढ़ें: 17 साल बाद फिर साथ आए Vidya Balan और R Balki, 'पा' के बाद नई तमिल फिल्म की शूटिंग शुरू, सेट से पहली फोटो वायरल


राउज़ एवेन्यू कोर्ट में चल रहा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला CBI के 'ज़मीन के बदले नौकरी' वाले केस से जुड़ा है। यह मामला उन आरोपों से संबंधित है जिनमें कहा गया है कि 2004-2009 के दौरान, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, रेलवे में ग्रुप-D पदों पर नौकरी देने के बदले ज़मीन के टुकड़े लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम ट्रांसफर किए गए थे। आरोपी इन आरोपों का खंडन कर रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुरू में अपनी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में व्यवसायी अमित कात्याल, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य को आरोपी बनाया था। बाद में एजेंसी ने सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और अन्य के नाम शामिल किए। ED ने जनवरी 2024 में अमित कात्याल, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य के खिलाफ इस मामले में अपनी पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की थी। एजेंसी ने कात्याल को लालू प्रसाद यादव का सहयोगी बताया था। बाद में, 6 अगस्त 2024 को ED ने लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और अन्य के नाम शामिल करते हुए एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की। कोर्ट ने 18 सितंबर 2024 को इस सप्लीमेंट्री कंप्लेंट का संज्ञान लिया और आरोपियों को नोटिस जारी किए। 
ED की सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में तेज प्रताप यादव का नाम आरोपी के तौर पर शामिल नहीं था, लेकिन कोर्ट को उन्हें और दूसरे आरोपियों को समन भेजने के लिए पर्याप्त सबूत मिले थे। 

इसे भी पढ़ें: बदल गया है Jammu-Kashmir, अब आतंकी कुछ समय भाग तो सकते हैं मगर सुरक्षाबलों की गोली से बच नहीं सकते, मूसा के मारे जाने से देश में खुशी की लहर

14 मार्च 2026 को ED ने तत्कालीन स्पेशल जज विशाल गोगने के सामने आरोप तय करने पर अपनी दलीलें पूरी की थीं। एजेंसी ने तर्क दिया कि लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत थे और आरोप लगाया कि अपराध से मिली रकम का इस्तेमाल उन्होंने किया था। ED ने आरोप लगाया है कि A K इन्फोसिस्टम्स को 2006-07 में अमित कात्याल के प्रमोटर के तौर पर शामिल करके बनाया गया था और कंपनी ने कोई खास बिजनेस एक्टिविटी करने के बजाय कई ज़मीन के टुकड़े खरीदे थे। एजेंसी के मुताबिक, एक प्रॉपर्टी कथित ज़मीन-के-बदले-नौकरी घोटाले से जुड़ी थी और बाद में 2014 में कंपनी को 1 लाख रुपये में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को ट्रांसफर कर दिया गया था। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि 1996 में बनी कंपनी A B एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का इस्तेमाल न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में एक प्रॉपर्टी खरीदने के लिए किया गया था। ED के मुताबिक, 2007 में पांच कंपनियों के ज़रिए 5 करोड़ रुपये का फंड भेजा गया और बाद में प्रॉपर्टी खरीदी गई। ED ने अपनी जांच के सिलसिले में मार्च 2024 में दिल्ली-NCR, पटना, मुंबई और रांची में 24 जगहों पर तलाशी ली थी। एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान बिना हिसाब-किताब वाला कैश, विदेशी मुद्रा, सोने की ईंटें, सोने के गहने और प्रॉपर्टी व सेल डीड से जुड़े दस्तावेज़ बरामद हुए थे। एजेंसी ने जांच के दायरे में आए अपराध से मिली रकम का अनुमान लगभग 600 करोड़ रुपये लगाया था, जिसमें अचल संपत्तियां और कथित तौर पर बेनामीदारों के ज़रिए किए गए ट्रांज़ैक्शन शामिल थे।

All the updates here:

अन्य न्यूज़