महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश में टिड्डी दल ने बोला धावा, प्रकोप बढ़ने की आशंका

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मई 29, 2020   09:12
महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश में टिड्डी दल ने बोला धावा, प्रकोप बढ़ने की आशंका

हरियाणा प्रशासन ने कहा है कि यद्यपि टिड्डी दल ने राज्य में प्रवेश नहीं किया है, लेकिन हम उच्च स्तरीय सावधानी बरत रहे हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग संजीव कौशल ने बताया, ‘‘हम तैयार हैं, सात जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

नयी दिल्ली। टिड्डी दल के हमले से बचाव के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों ने जहां एक तरफ भारी मात्रा में कीटनाशक का छिड़काव किया तो वहीं दूसरी तरफ लोगों ने थाली और तेज संगीत बजाकर भी इन्हें भगाने का प्रयास किया। दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में सरकारों ने टिड्डी दल के पहुंचने को लेकर अलर्ट जारी किए हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार, टिड्डियों के झुंड के बिहार और ओडिशा तक पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन दक्षिण भारत में इन कीटों के पहुंचने की संभावना कम है। एफएओ ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में, भारत में टिड्डियों के वयस्क समूहों का आना हुआ है और ये भारत-पाकिस्तान सीमा से पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं। एफएओ ने ताजा सूचना में कहा कि टिड्डियों के झुंड उत्तरी भारत की ओर चले गए हैं। राजस्थान के पश्चिम भाग से आये टिड्डियों के समूह राज्य के पूर्वी हिस्से तथा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे मध्यवर्ती राज्यों की ओर बढ़ रहे हैं। हरियाणा ने पड़ोसी राजस्थान और कुछ अन्य राज्यों में टिड्डी दल के फसलों पर हमले के बाद सात जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। 

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हरियाणा प्रशासन ने कहा है कि यद्यपि टिड्डी दल ने राज्य में प्रवेश नहीं किया है, लेकिन हम उच्च स्तरीय सावधानी बरत रहे हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग संजीव कौशल ने बताया, ‘‘हम तैयार हैं, सात जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। हमारे पास कीटनाशकों का पर्याप्त भंडार है और हमने किसानों के समूह को भी सूचित कर दिया है। यहां तक कि हमने व्हाट्सएप पर भी किसानों का एक समूह बनाया है।’’ उन्होंने बताया, ‘‘छिड़काव की सुविधा वाले ट्रैक्टरों को भी तैयार किया गया है। हम सभी एहतियात बरत रहे हैं।’’ वहीं, देश के कुछ हिस्सों में टिड्डी दल के धावा के बीच कर्नाटक सरकार ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि हवा की दिशा में बदलाव के चलते राज्य में टिड्डी दल के पहुंचने की संभावना बेहद कम है। कृषि मंत्री बीसी पाटिल ने संवाददाताओं से कहा कि बचाव उपायों के तहत, टिड्डी दल के हमले की सूरत में इससे निपटने के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें कृषि और उद्यान विभाग के निदेशकों समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस बीच, पाकिस्तान की सीमा से राजस्थान में घुसी टिड्डियों के हमले से राजस्थान के जिलों का लगभग 90,000 हेक्टेयर इलाका प्रभावित हुआ है। 

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एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि टिड्डी नियंत्रण दलों द्वारा किये गये कीटनाशक छिड़काव के बाद टिड्डियां श्रीगंगानगर से चलकर नागौर, जयपुर, दौसा, करौली और सवाई माधोपुर और अन्य क्षेत्रों से गुजरती हुई उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की ओर बढ गई। कृषि विभाग के आयुक्त ओम प्रकाश ने बताया कि टिड्डियों के हमले से श्रीगंगानगर में लगभग 4,000 हेक्टेयर भूमि पर लगी फसल को नुकसान हुआ वहीं नागौर में 100 हेक्टेयर भूमि की फसल को चट कर दिया। हालांकि, उत्तर प्रदेश में झांसी सहित कुछ जिलों में बुधवार शाम पहुंचे टिड्डी दल में शामिल लाखों कीटों को रसायनों के गहन छिड़काव की मदद से नष्ट कर दिया गया। बचे हुए टिड्डी झुंड को भगाने की कोशिशें जारी है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रदेश स्तर पर टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु नियंत्रण कक्ष तथा गठित टीमें, टिड्डी दलों के प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में आक्रमण एवं उनकी गतिविधियों का नियमित पर्यवेक्षण करें तथा सम्बन्धित जिलों को आवश्यक सुरक्षात्मक निर्देश दें। 

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झांसी मंडल के कृषि उपनिदेशक कमल कटियार ने बृहस्पतिवार को बताया कि बुधवार रात गरौठा और मौठ इलाके में पहुंचे टिड्डी दल पर जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा रात भर किए गए कीटनाशक के छिड़काव एवं अन्य उपायों के जरिए लाखों की संख्या में टिड्डे मारे गए हैं। उन्होंने बताया कि बची हुई टिड्डियों का एक छोटा दल इस वक्त झांसी के निकट पारीछा की ओर घूम रहा है, जिसे भगाने के एवं मारने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, टिड्डी दल पूर्वी महाराष्ट्र से बृहस्पतिवार की दोपहर में मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में प्रवेश कर गया। संभागीय संयुक्त कृषि निदेशक रवि भोसले ने बताया कि दोपहर एक बजे के करीब टिड्डी दल को महाराष्ट्र के भंडारा जिले की तुमसर तहसील के सोंडया गांव में देखा गया। उन्होंने पीटीआई-को बताया कि इसके बाद टिड्डी दल बावनथड़ी नदी को पार कर गया और बालाघाट जिला पहुंच गया। भोसले ने कहा, ‘‘मध्यप्रदेश के कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारियों और क्षेत्रीय आईपीएम (एकीकृत कीटनाशक प्रबंधन) केंद्र के वैज्ञानिकों ने भंडारा के अधिकारियों से बातचीत की और स्थिति का जायजा लिया।’’ उधर, दिल्ली सरकार ने राजधानी में रेगिस्तानी टिड्डियों के संभावित हमले को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों से खड़ी फसलों, बाग-बगीचों में कीटनाशकों का छिड़काव करने को कहा है। दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने कहा कि इस मुद्दे पर जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बृहस्पतिवार को ट्वीट किया कि सरकार ने लोगों को फसलों, बाग-बगीचों को टिड्डी दल के प्रकोप से बचाने के लिए कीटनाशकों के संबंध में जानकारी वाला परामर्श जारी किया है। 

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परामर्श के अनुसार, ‘‘टिड्डी दल दिन में उड़ता है और रात में आराम करता है, इसलिए इसे रात में नहीं ठहरने देना चाहिए।’’ इसमें अधिकारियों से क्लोरोपायरीफोस और मैलाथियोन कीटनाशकों का छिड़काव करने को कहा गया है। दूसरी तरफ, हिमाचल प्रदेश में टिड्डियों के दल के हमले का अलर्ट जारी किया गया है। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि हाई अलर्ट, राज्य के 12 में से चार जिलों के लिए जारी किया गया है जिनमें कांगड़ा, ऊना, बिलासपुर और सोलन हैं। राज्य के कृषि निदेशक आर के कौंडल ने कहा कि रेगिस्तानी टिड्डियों का विशाल झुंड आस-पास के राज्यों में फसलों को नष्ट कर रहा है। वे हिमाचल प्रदेश में भी फैल सकते हैं। उन्होंने कहा कि टिड्डियों की गतिविधि पर निरंतर और लगातार नजर रखने के लिए क्षेत्र के कर्मचारियों को सतर्क कर दिया गया है और टिड्डियों के कारण सामने आने वाली किसी भी आपात स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। इससे पहले, एफएओ के महानिदेशक क्यू डोन्ग्यू ने 22 मई को आगाह किया था कि रेगिस्तानी टिड्डियों को नियंत्रित करने के प्रयासों में समय लगेगा। आने वाले महीनों में, इथियोपिया, केन्या और सोमालिया में रेगिस्तानी टिड्डियों के दल प्रजनन जारी रखेंगे। जून में नए टिड्डे बनेंगे और दक्षिण सूडान से सूडान में जाएंगे और पश्चिम अफ्रीका में सहेल के लिए खतरा पैदा करेंगे। भारत-पाकिस्तान सीमा के दोनों तरफ खतरा बढ़ गया है। ईरान और पाकिस्तान में प्रकोप अभी भी जारी है। नियंत्रण के तमाम प्रयासों के बावजूद, हाल ही में भारी बारिश ने कई देशों में कीटों के प्रजनन के लिए आदर्श स्थिति पैदा की है।





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