लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर कल शुरू हो सकती है चर्चा, गतिरोध दूर करने पर बनी सहमति

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नीट प्रश्नपत्र लीक मामले पर जारी गतिरोध के बीच लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पर मंगलवार से चर्चा शुरू होने की संभावना है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर सभी राजनीतिक दल इस महत्वपूर्ण चर्चा के लिए सहमत हो गए हैं। इस विधेयक में प्रश्नपत्र लीक करने और संगठित अपराधों के लिए कड़े दंड और जुर्माने के प्रावधान शामिल हैं।

नयी दिल्ली, 27 जुलाई नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर लोकसभा में जारी गतिरोध दूर करने पर सहमति बन गई है और मंगलवार से सदन में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हो सकती है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने कहा, ‘‘लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर सभी प्रमुख राजनीतिक दल मंगलवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2026 पर चर्चा के लिए सहमत हो गए हैं।’’ प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया।

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन से संबंधित इस विधेयक में संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। बिरला ने सोमवार को सदन की कार्यवाही के दौरान सभी दलों से इस विधेयक पर चर्चा शुरू कराने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारे देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, उनकी मेहनत और उनकी आकांक्षाओं से जुड़ा अत्यधिक महत्वपूर्ण विधेयक है। यह विधेयक प्रश्नपत्र लीक जैसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने, दोषियों के विरुद्ध कठोर दंड प्रावधान कर करोड़ों युवाओं के हितों की रक्षा की दिशा में अहम कदम है।’’ उन्होंने सत्तापक्ष और विपक्ष को तीन घंटे का समय देते हुए कहा कि ‘‘शाम को पांच बजे तक सरकार और सभी दल मिलकर सहमति बनाएं, ताकि पांच बजे इस विधेयक पर चर्चा शुरू हो सके।’’ बिरला ने कहा कि वह इस विधेयक पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय देने के लिए तैयार हैं तथा सदस्य चाहें तो और भी अधिक समय बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, आज सदन में इस विधेयक पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी और कार्यवाही तीन बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

सूत्रों के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ने विभिन्न राजनीतिक दलों के सदनों के नेताओं से बातचीत की और परिणामस्वरूप सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मंगलवार को विधेयक पर विस्तृत चर्चा कराने को लेकर सहमति बनी।

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