महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना से 81 लाख महिलाएं बाहर, ई-केवाईसी सत्यापन के बाद सरकार की बड़ी कार्रवाई

महाराष्ट्र सरकार ने ई-केवाईसी सत्यापन प्रक्रिया के बाद लाडकी बहिन योजना से लगभग 81 लाख लाभार्थियों के नाम हटा दिए हैं। मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि अपात्र लाभार्थियों और सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को हटाने के लिए यह कदम उठाया गया है, जबकि विपक्ष ने इसे चुनावी हथकंडा बताया है।
महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने जानकारी दी है कि कई महीनों तक चली ई-केवाईसी सत्यापन प्रक्रिया के बाद राज्य सरकार की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना से करीब 81 लाख पंजीकृत लाभार्थियों के नाम हटा दिए गए हैं। मंत्री ने मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि अपात्र लाभार्थियों, आयकर दाताओं और सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को व्यवस्थित तरीके से हटाने के लिए यह सत्यापन प्रक्रिया अनिवार्य थी।
अदिति तटकरे ने योजना के आंकड़ों का विवरण देते हुए बताया कि शुरुआत में 2.63 करोड़ लोगों ने इसके लिए पंजीकरण कराया था, जिनमें से 2.47 करोड़ महिलाएं लाभार्थी बनीं और उन्हें मासिक आर्थिक सहायता दी गई। हालांकि, जब विभाग ने सत्यापन प्रक्रिया शुरू की, तो यह संख्या कम होने लगी। उन्होंने बताया कि लगभग 62 लाख महिलाओं ने समय सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की, जिसके कारण उन्हें योजना से बाहर करना पड़ा।
मंत्री ने आगे बताया कि करीब 16 लाख लाभार्थियों की वार्षिक पारिवारिक आय ढाई लाख रुपये से अधिक पाई गई, जबकि 4.42 लाख महिलाओं को इसलिए अयोग्य घोषित किया गया क्योंकि उनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी था। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ पुरुषों और स्वयं सरकारी कर्मचारियों ने भी इस योजना के लिए पंजीकरण कराया था और इसका लाभ उठाया था। सरकार ने अब ऐसे सरकारी कर्मचारियों से पैसा वसूलना शुरू कर दिया है और यह राशि सरकारी खजाने में जमा की जा रही है।
इस बीच, विपक्षी दलों ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस योजना के लिए स्वीकृत बजट से 3,541 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए हैं और इस अतिरिक्त व्यय का कोई हिसाब नहीं रखा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आवास और स्वच्छता जैसी बुनियादी योजनाओं के बजट में कटौती करके इस योजना पर भारी खर्च किया गया।
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने भी सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले वोट पाने के लिए नियमों की अनदेखी कर महिलाओं को लाभ दिया गया और अब चुनाव के बाद उन्हें अपात्र बताकर हटाया जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रवक्ता अनिल शिदोरे ने भी इस घटनाक्रम को परेशान करने वाला बताते हुए कहा कि अपात्र लाभार्थियों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करना सरकारी धन का दुरुपयोग है।
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