Prabhasakshi NewsRoom: Uddhav के हर वार पर Shinde का जोरदार पलटवार, Balasaheb Thackeray की विरासत को लेकर जबरदस्त महासंग्राम

Uddhav Shinde
Image Source: ANI/@ShivSenaUBT_

महाराष्ट्र में एक तरफ उद्धव ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं को पार्टी के साथ बनाये रखने की कोशिश में भावनात्मक दांव खेल रहे हैं, तो दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे ताकत, सत्ता और संगठन के दम पर ठाकरे खेमे को लगातार चुनौती दे रहे हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना के भीतर उठी बगावत ने ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसने ठाकरे बनाम शिंदे की जंग को और ज्यादा विस्फोटक बना दिया है। मुंबई में शिवसेना स्थापना दिवस के मंच से उद्धव ठाकरे ने भावुक अंदाज में पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने अपनी पीड़ा रखी। उन्होंने साफ कहा कि अगर शिवसैनिकों का भरोसा उन पर नहीं रहा तो वह इसी वक्त पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन शिवसेना को चोरों और लुटेरों के हाथों में नहीं जाने देंगे। उद्धव का यह बयान सिर्फ भावुक अपील नहीं था, बल्कि उस राजनीतिक भूचाल की गूंज थी जिसने एक बार फिर ठाकरे खेमे की नींद उड़ा दी है।

उद्धव ठाकरे ने मंच से साफ कहा कि उन्हें खुशी होगी अगर पार्टी का कोई साधारण कार्यकर्ता आगे बढ़कर शिवसेना की कमान संभाले, लेकिन वह कभी यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि पार्टी पर कब्जा उन लोगों का हो जाए जिन्होंने विश्वासघात किया है। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और विधान परिषद सदस्यता जारी नहीं रखने के फैसले का भी बचाव किया। उद्धव ने कहा कि वह नहीं चाहते कि कोई शिवसैनिक उन पर उंगली उठाए कि सत्ता बचाने के लिए उन्होंने सिद्धांत बेच दिए।

इसे भी पढ़ें: NDA से मिल रहे झटकों से उबरने के लिए Congress में लौटेंगे Sharad Pawar, Mamata Banerjee, Jagan Mohan Reddy!

लेकिन इसी बीच दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे ने ऐसा हमला बोला जिसने ठाकरे खेमे को भीतर तक झकझोर दिया। शिंदे ने अपने कार्यकर्ताओं के बीच गरजते हुए कहा कि कुछ लोग पिछले कई दिनों से भौंक रहे हैं, लेकिन बाघ हमेशा अकेला चलता है। शिंदे का यह बयान सीधे उद्धव ठाकरे पर हमला माना जा रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अभी तो सिर्फ ट्रेलर दिखा है, पूरी फिल्म बाकी है। इस एक लाइन ने महाराष्ट्र की राजनीति में सनसनी फैला दी है, क्योंकि इसे ठाकरे खेमे में और बड़ी टूट की खुली चेतावनी माना जा रहा है।

दरअसल संकट की असली वजह वही छह सांसद हैं जिन्होंने हाल ही में दिल्ली में हुई शिवसेना संसदीय दल की बैठक से दूरी बना ली। इन सांसदों की गैरमौजूदगी ने यह अटकलें तेज कर दीं कि वे जल्द ही सत्तारुढ़ गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं। इसी को लेकर अब महाराष्ट्र की राजनीति में "ऑपरेशन टाइगर" की चर्चा जोर पकड़ रही है। माना जा रहा है कि ठाकरे गुट में एक और बड़ी सेंध लग सकती है।

उधर, अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने इन बागी सांसदों पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए जनता से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं ने इन सांसदों को जिताया था, उनसे वह क्षमा चाहते हैं क्योंकि वे अब दल बदल की राह पर हैं। यह बयान साफ दिखाता है कि ठाकरे अब विश्वासघात की चोट को खुलकर जनता के सामने रख रहे हैं।

आदित्य ठाकरे ने भी बागी नेताओं पर जबरदस्त हमला बोला। उन्होंने उन्हें बेशर्म, एहसान फरामोश और भ्रष्ट करार देते हुए कहा कि जिन लोगों को जनता ने जिताया, वही अब जनता की पीठ में छुरा घोंप रहे हैं। ठाकरे परिवार का यह गुस्सा दिखा रहा है कि पार्टी के भीतर बगावत अब सिर्फ राजनीतिक संकट नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।

उद्धव ठाकरे ने इस दौरान कांग्रेस में विलय की अटकलों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जब शिवसेना ने तीस साल तक भाजपा के साथ रहकर भी खुद को उसमें विलीन नहीं किया तो कांग्रेस में जाने का सवाल ही नहीं उठता। उद्धव ने दावा किया कि उन्होंने पूरे महाराष्ट्र का दौरा किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद बनाए रखा, तभी चुनावों में पार्टी को सफलता मिली।

वहीं एकनाथ शिंदे ने भी कोई मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बाघ की खाल ओढ़ लेने से कोई भेड़िया बाघ नहीं बन जाता। शिंदे ने साफ कहा कि उद्धव ठाकरे को आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर नेता उनकी पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं? उन्होंने दावा किया कि बालासाहेब ठाकरे के सपने को उन्होंने पूरा किया और शिवसेना को गांव गांव तक पहुंचाया।

शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे आज होते तो मोदी के काम की सराहना करते। उन्होंने महायुति गठबंधन को मजबूत बताते हुए कहा कि उनके और देवेंद्र फडणवीस के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। शिंदे ने यह भी दावा कर दिया कि विधान परिषद चुनाव में विपक्ष एक भी सीट नहीं जीत पाएगा।

बहरहाल, इस पूरी सियासी जंग ने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र में शिवसेना अब दो हिस्सों में बंटी पार्टी भर नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसी राजनीतिक रणभूमि बन चुकी है जहां हर दिन नया विस्फोट हो रहा है। एक तरफ उद्धव ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं को पार्टी के साथ बनाये रखने की कोशिश में भावनात्मक दांव खेल रहे हैं, तो दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे ताकत, सत्ता और संगठन के दम पर ठाकरे खेमे को लगातार चुनौती दे रहे हैं। सवाल अब सिर्फ पार्टी पर कब्जे का नहीं, बल्कि उस विरासत का है जिसे बालासाहेब ठाकरे ने अपने खून पसीने से खड़ा किया था। ऐसा साफ दिख रहा है कि महाराष्ट्र की राजनीति में यह जंग अभी खत्म नहीं हुई, बल्कि असली तूफान शायद अब शुरू हुआ है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़