Mamata Banerjee को Supreme Court ने लगाई कड़ी फटकार, कहा, ''ऐसा आचरण लोकतंत्र को खतरे में डाल सकता है''

Mamata Supreme Court
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हम आपको याद दिला दें कि जब प्रवर्तन निदेशालय कोलकाता में आई पैक के कार्यालय पर छापेमारी कर रहा था उसी दौरान मुख्यमंत्री वहां पहुंच गई थीं। उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर ईडी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह एक असाधारण स्थिति है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले राज्य में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस को करारा झटका लगा है। हम आपको बता दें कि आई पैक के कार्यालय में ईडी की छापेमारी के दौरान हस्तक्षेप करने के लिए ममता बनर्जी को देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ी फटकार लगाई है और इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया है। इससे पहले, अभी कुछ दिन पहले ही मालदा में सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे तक बंधक बनाये रखने की घटना को लेकर भी उच्चतम न्यायालय ने ममता बनर्जी सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा था कि राज्य में कानून व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है।

हम आपको याद दिला दें कि जब प्रवर्तन निदेशालय कोलकाता में आई पैक के कार्यालय पर छापेमारी कर रहा था उसी दौरान मुख्यमंत्री वहां पहुंच गई थीं। उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर ईडी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह एक असाधारण स्थिति है, क्योंकि किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री जांच एजेंसी की कार्रवाई के बीच सीधे पहुंचकर उसमें दखल नहीं दे सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति का आचरण है, जो लोकतंत्र को खतरे में डाल सकता है।

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न्यायमूर्ति पीके मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल कानूनी तर्क देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर जो हो रहा है, उसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और हम सच्चाई के प्रति अपनी आंखें बंद नहीं रख सकते। अदालत ने यह भी कहा कि राज्य में पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनसे व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं, इसलिए इस मामले को गंभीरता से देखना जरूरी है। हम आपको बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय एक जांच के तहत कोलकाता और दिल्ली सहित कई जगहों पर छापेमारी कर रहा था। यह जांच राजनीतिक रणनीति से जुड़ी संस्था आई पैक से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर की जा रही थी। एजेंसी का कहना है कि उसकी कार्रवाई पूरी तरह साक्ष्यों पर आधारित है और इसका किसी चुनाव या राजनीतिक दल से सीधा संबंध नहीं है।

मामला तब और गरमा गया था जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जांच के दौरान संबंधित व्यक्ति के घर पहुंच गयीं थीं। आरोप है कि उनके साथ मौजूद लोगों ने वहां से कुछ अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हटा लिए। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद देश भर में चर्चा शुरू हो गई थी। खास तौर पर एक हरे रंग की फाइल, जिसे मुख्यमंत्री अपने साथ ले जाती दिखाई दीं, वह बहस का विषय बन गई थी। न्यायालय ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल जांच को प्रभावित करती हैं, बल्कि कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रणाली पर भी असर डालती हैं। अदालत ने संकेत दिया कि वह इस मामले को पूरी गंभीरता से देखेगा और वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए फैसला करेगा।

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