वह मुसलमान नेता जिसने तीन तलाक के खिलाफ दी थी राजीव गांधी को चुनौती

By अंकित सिंह | Publish Date: Jun 26 2019 4:09PM
वह मुसलमान नेता जिसने तीन तलाक के खिलाफ दी थी राजीव गांधी को चुनौती
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इसके बाद उन्होंने पूरे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि इसके बाद मैंने अपने घर जाने की बजाए दोस्त के यहां जाना बेहतर समझा क्योंकि मैं किसी से संपर्क नहीं करना चाहता था।

मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर हुए चर्चा में बाद उठे सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। प्रधानमंत्री ने बिना नाम लिए कांग्रेस के एक नेता का बयान पढ़ा जिसमें कहा गया था- मुसलमानों के उत्थान की जिम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है। अगर कोई गटर में रहना चाहता हैं तो उसे रहने दो। मोदी का यह बयान मुस्लिम समुदाय के लिए मोदी सरकार का रवैया और तीन तलाक पर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल पर आया। हम सब इस बयान को एक सामान्य बयान मानकर ही भूल जना बेहतर समझा। पर अचानक से कांग्रेस के एक पूर्व नेता मीडिया के सामने आते है और मोदी के इस बयान पर अपना पक्ष रखी है। वह नेता कहीं ना कहीं अपने पूर्व में दिए गए बयान पर कायम नजर आ रहे थे। वह नेता कोई और नहीं बल्कि राजीव गांधी की सरकार में मंत्री रहे आरिफ मोहम्मद खान हैं।  

आरिफ मोहम्मद खान मीडिया में आते हैं और कहते हैं कि मैंने 6-7 साल पहले एक टीवी साक्षात्कार के दौरान अपने इस्तीफे (शाह बानो मामले) पर पूछे गए सवाल पर कहा था कि शाह बानो केस में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के फैसले पर विरोध करते हुए अपना इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने पूरे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि इसके बाद मैंने अपने घर जाने की बजाए दोस्त के यहां जाना बेहतर समझा क्योंकि मैं किसी से संपर्क नहीं करना चाहता था। अगले दिन संसद पहुंचने पर मैं अरुण सिंह से मिला, जिन्होंने मुझे बार-बार कहा कि मैं नैतिक रूप से सही हूं, लेकिन इससे पार्टी को बहुत असुविधा होगी। इसके बाद नरसिम्हा राव आते हैं और कहते हैं कि तुम इतना अच्छा बोलते हो, लेकिन जिद्दी बहुत हो। आरिफ की माने तो नरसिम्हा राव ने उनसे बातचीत के दौरान कहा कि मुसलमानों का सामाजिक सुधार करने के लिए कांग्रेस पार्टी नहीं है और तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? लेकिन इसके बाद नरसिम्हा राव ने जो कहा वह हैरान करने वाला था। राव ने आरिफ से कहा कि अगर कोई गटर में पड़े रहना चाहता है तो रहने दो। बता दें कि 1980 के दशक के तीन तलाक के चलते शाह बानो प्रकरण हुआ था और देश की सबसे बड़ी अदालत ने तलाकशुदा शाहबानो के पक्ष में फैसला दिया था जिसे राजीव गांधी की सरकार ने पलट दिया था। 
आरिफ मोहम्मद खान भारत सरकार में एक पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे हैं। उनके पास समय-समय पर ऊर्जा से लेकर नागरिक उड्डयन तक के कई पोर्टफोलियो रहे हैं। शाह बानो मामले के समय गृहराज्य मंत्री रहे आरिफ मोहम्मद खान का जन्म 1951 में बुलंदशहर में हुआ था। उन्होंने जामिया मिलिया स्कूल, दिल्ली और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ और लखनऊ विश्वविद्यालय के शिया कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है। छात्र नेता के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले आरिफ मोहम्मद खान 26 साल की उम्र में 1977 में विधायक बने। बाद में खान कांग्रेस में शामिल हो गए और 1980 में कानपुर और 1984 में बहराइच से लोकसभा के लिए चुने गए। 1986 में मुस्लिम पर्सनल लॉ बिल के पारित होने पर मतभेद के कारण उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। वह ट्रिपल तलाक कानून के खिलाफ भी थे और इस मुद्दे पर राजीव गांधी के साथ मतभेद के कारण इस्तीफा दे दिया। आरिफ मोहम्मद खान जनता दल में शामिल हो गए और 1989 में फिर से लोकसभा के लिए चुने गए। 
वीपी सिंह की सरकार में उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन और ऊर्जा मंत्री के रूप में अपनी सेवा दी। जनता दल को उन्होंने बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने के लिए छोड़ दिया और 1998 में फिर से बहराइच से लोकसभा में सदस्य निर्वाचित हुए। 2004 में वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए और कैसरगंज निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा पर हार गए। खान ने 2007 में भाजपा यह कह कर छोड़ दी कि उन्हें पार्टी में नजरअंदाज किया जा रहा था। आरिफ मोहम्मद खान धार्मिक विचारों को सुधारने में सक्रिय रूप से शामिल रहते हैं। उन्होंने एक बार राम मंदिर पर बयान देते हुए कहा था कि यह देश न कभी भगवान राम को भूला है और न ही भूल सकता है, क्योंकि राम जीवन दर्शन में शामिल हैं। ऐसे में राम मंदिर को लेकर विवाद बेवजह है।
 

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