• विपक्ष विहीन हो जाएगा नागालैंड, सत्तारुढ़ गठबंधन में शामिल होने की तैयारी में NPF

अंकित सिंह Jul 22, 2021 10:41

एनपीएफ के एक नेता ने बताया कि हम जल्द ही नागा राजनीतिक मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए गैर विपक्षी सरकार बनाने की सोच रहे हैं। हालांकि उन्होंने पार्टियों के विलय के सवाल से इंकार कर दिया और कहा कि अभी सिर्फ हम गठबंधन में शामिल हो रहे हैं।

नागालैंड एक बार फिर से विपक्ष विहीन हो सकता है। 2015 के बाद से यह दूसरी बार होगा जब नागालैंड में विपक्ष नहीं बचेगा और वह सरकार का हिस्सा हो सकता है। दरअसल, नागालैंड की मुख्य विपक्षी पार्टी नागा पीपुल्स फ्रंट ने नेफिउ रियो के नेतृत्व में पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस में शामिल होने की पेशकश की है। आपको बता दें कि नागालैंड विधान सभा में एनपीएफ के 25 सदस्य है। एनपीएफ के एक नेता ने बताया कि हम जल्द ही नागा राजनीतिक मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए गैर विपक्षी सरकार बनाने की सोच रहे हैं। हालांकि उन्होंने पार्टियों के विलय के सवाल से इंकार कर दिया और कहा कि अभी सिर्फ हम गठबंधन में शामिल हो रहे हैं।

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नागालैंड विधान सभा में 60 सदस्य होते हैं। लेकिन एक सदस्य के निधन के बाद से वर्तमान में यहां 59 सदस्य हैं। माना जा रहा है कि एनपीएफ जल्द ही नेफिउ रियो के नेतृत्व वाले पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस का हिस्सा हो सकती है। इसके लिए मुख्यमंत्री को एक आधिकारिक पत्र भी सौंपा जा चुका है। इसमें कहा गया है कि एनपीएफ शांति प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से गठबंधन का हिस्सा बनना चाहती है। हालांकि NDPP के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ गठबंधन फिलहाल इस मुद्दे पर सोच समझकर फैसला लेना चाहती है। फिलहाल भाजपा के नागालैंड प्रभारी नलिन कोहली भी वहां पहुंचने वाले हैं। सूत्रों की मानें तो पिछले महीने नागा शांति मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री के साथ-साथ विपक्ष नेता जेलियांग के बीच एक अहम बैठक हुई थी। इसके बाद से इस रणनीति पर चर्चा की शुरुआत हो गई। आपको बता दें कि पीडीए के 34 सदस्य हैं जिसमें से 20 विधायक एनडीपीपी के हैं जबकि 12 विधायक भाजपा के दो निर्दलीय विधायक हैं।

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वहीं, कांग्रेस की नगालैंड इकाई ने लंबे समय से चल रहे नगा विद्रोह के राजनीतिक समाधान का मार्ग प्रशस्त करने के लिए राज्य विधानसभा के सभी 60 विधायक से इस्तीफा देने का अनुरोध किया है। नगालैंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एनपीसीसी) की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) ने कांग्रेस भवन में 16 जुलाई को हुयी बैठक में इस संबंध में अपील जारी करने का फैसला किया। इसके बाद रविवार को यहां जारी एक विज्ञप्ति के माध्यम से यह अपील की गयी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और असम-नगालैंड सीमा पर गड़बड़ी पर काफी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद पीएसी ने सर्वसम्मति से तीन सूत्री प्रस्ताव पारित किया।