NCW प्रमुख विजया रहाटकर बोलीं, देश में हर क्षेत्र का नेतृत्व कर रहीं महिलाएं

राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख विजया रहाटकर ने कहा कि भारत में महिलाएं केवल भागीदारी तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी नेतृत्व क्षमता साबित कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम जल्द लागू होगा।
(कोमल शर्मा) नयी दिल्ली, छह नवंबर राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि भारत में महिलाएं केवल भागीदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे नेतृत्व भी कर रही हैं और उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित की है। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम जल्द ही लागू किया जाएगा। रहाटकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि महिलाओं को जब भी अवसर मिला है, उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की है।
इसका उदाहरण 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के बाद पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं का बढ़ता प्रतिनिधित्व है। उन्होंने कहा, हमारे देश में महिलाएं केवल भागीदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश का नेतृत्व करने वाली महिलाएं हैं। यह महज कहने की बात नहीं है।
हमने प्राचीन काल से ऐसा होते देखा है। भारत की महिलाओं ने समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र में अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया है। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का जिक्र करते हुए रहाटकर ने कहा कि शुरुआत में इस बात को लेकर संदेह जताया गया था कि महिलाएं अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर पाएंगी या नहीं।
उन्होंने कहा, शुरुआत में लोगों के मन में सवाल थे कि महिलाएं कैसे काम करेंगी। उन्हें लगता था कि महिलाएं केवल पांच साल के लिए व्यवस्था में आई हैं। हालांकि, महिलाओं ने अपना काम सीखा और आज उन्होंने इतना अच्छा प्रदर्शन किया है कि कई राज्य सरकारों ने आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है।
रहाटकर ने कहा, आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो पाते हैं कि 33 प्रतिशत आरक्षण के तहत भी महिलाओं ने असाधारण प्रदर्शन किया है। यही वजह है कि बाद में कई राज्य सरकारों ने आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़कर 54, 55 और यहां तक कि 56 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
महिलाओं को उनके लिए आरक्षित सीटों के अलावा सामान्य श्रेणी की सीटों से भी चुनाव जीतने का अवसर मिल रहा है। महिलाओं को समान अवसर देने और लैंगिक अंतर को कम करने की जरूरत पर जोर देते हुए एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पारित होना निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, आज वर्षों के इंतजार के बाद हमारे देश में आखिरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो गया है।
अब केवल इसके लागू होने का इंतजार है। रहाटकर ने विश्वास जताया कि इस कानून को लागू करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच सहमति बनाई जाएगी और महिलाएं लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में उल्लेखनीय योगदान देंगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने जब भी नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली है, उसे पूरी निष्ठा और निष्पक्षता के साथ निभाने की अपनी क्षमता लगातार साबित की है।
महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी किए जाने के बाद यह कानून 16 अप्रैल, 2026 से लागू हो गया। कानून के मुताबिक, इसके लागू होने के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही महिला आरक्षण लागू किया जाएगा।
हालांकि, सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के उद्देश्य से लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने से संबंधित विधेयक पारित नहीं करा सकी। इस विधेयक में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने का प्रस्ताव था। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पक्ष में 298 सदस्यों ने मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट दिया।
मतदान में शामिल कुल 528 सदस्यों में से विधेयक पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की जरूरत थी।
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