NEET Scam 2024: एक एजेंसी, दो Exam, अलग सिस्टम क्यों? NTA की पेन-पेपर वाली जिद पर उठे सवाल

NEET Paper
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । May 13 2026 10:39PM

नीट परीक्षा में बार-बार हो रहे पेपर लीक के पीछे इसकी पेन-एंड-पेपर आधारित प्रणाली और हजारों केंद्रों पर एक साथ आयोजन को मुख्य कारण माना जा रहा है, जबकि जेईई मेन अपनी कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) और मल्टी-शिफ्ट प्रारूप के कारण ऐसी धांधली से काफी हद तक सुरक्षित है।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 एक बार फिर विवादों में आ गई है। पेपर लीक की आशंकाओं और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द किए जाने से लाखों छात्रों और उनके परिवारों में नाराजगी देखी जा रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार इस पूरे मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी गई है। बता दें कि इस बार करीब 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नीट परीक्षा पर सवाल उठे हैं। इससे पहले साल 2024 में भी पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। ऐसे में अब लगातार यह सवाल उठ रहा है कि आखिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित होने वाली दूसरी बड़ी परीक्षा जेईई मेन में इस तरह के मामले कम क्यों देखने को मिलते हैं, जबकि नीट बार-बार विवादों में फंस जाती है।

जानकारों के मुताबिक इसका सबसे बड़ा कारण दोनों परीक्षाओं के आयोजन का तरीका माना जा रहा है। नीट परीक्षा आज भी पूरी तरह पेन और पेपर मोड में आयोजित होती है। इसके लिए लाखों प्रश्नपत्रों की छपाई करनी पड़ती है और फिर उन्हें देशभर के हजारों परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई स्तर पर अलग-अलग लोगों की भूमिका होती है, जिससे गोपनीयता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन जाता है।

वहीं दूसरी ओर जेईई मेन परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित प्रणाली पर आयोजित की जाती है। इसमें प्रश्नपत्र सुरक्षित डिजिटल सर्वर पर रखे जाते हैं और परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही केंद्रों पर ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। यही वजह है कि इसमें पेपर लीक का खतरा काफी कम माना जाता है।

बता दें कि नीट परीक्षा पूरे देश में एक ही दिन और एक ही प्रश्नपत्र के साथ आयोजित होती है। ऐसे में यदि किसी एक केंद्र पर भी पेपर से जुड़ी गड़बड़ी सामने आती है तो पूरी परीक्षा प्रभावित हो जाती है। इसके विपरीत जेईई मेन कई दिनों और अलग-अलग शिफ्टों में आयोजित होती है। हर शिफ्ट में अलग प्रश्न पूछे जाते हैं, जिससे किसी एक सेट के लीक होने का असर पूरी परीक्षा पर नहीं पड़ता है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी दोनों परीक्षाओं में बड़ा अंतर माना जा रहा है। नीट के लिए हर साल करीब पांच हजार परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं, जिनमें स्कूल और कॉलेजों की बड़ी संख्या शामिल होती है। कई केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के स्तर में भी अंतर देखने को मिलता है। जबकि जेईई मेन के लिए सीमित और विशेष डिजिटल परीक्षा केंद्रों का इस्तेमाल किया जाता है, जहां कैमरे, ऑनलाइन निगरानी और तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था पहले से मौजूद रहती हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे विवादों के बाद अब नीट परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। कई लोग इसे भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनाने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल लाखों छात्र अगली घोषणा और जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

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