नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद गुजरात के एनआरआई समेत 26 लोग लापता, तलाश जारी

नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद से गुजरात से जुड़े कई तीर्थयात्री और एनआरआई लापता हैं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार लापता लोगों की संख्या 26 पहुंच गई है और अब तक किसी का सुराग नहीं मिला है। पीड़ित परिवारों ने उच्चायोग और राज्य सरकार से संपर्क साधकर मदद की गुहार लगाई है।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ में लापता तीर्थयात्रियों के भविष्य को लेकर अनिश्चितताओं के बीच अहमदाबाद निवासी सनी पारिख को अब भी उम्मीद है कि उनकी 65 वर्षीय मां सुरक्षित लौटेंगी। उनकी मां अमेरिकी नागरिक हैं। गांधीनगर में धवल रावल अपने भाई भाविनकुमार की खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
भाविनकुमार ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं और नेपाल में 26 अगस्त की सुबह हुई त्रासदी के बाद से लापता हैं। इस बीच, उनके दो छोटे बेटे अपने पिता के सुरक्षित घर लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के बाद लापता हुए गुजरात से जुड़े तीर्थयात्रियों, जिनमें अनिवासी भारतीय (एनआरआई) भी शामिल हैं, के परिजन अपने प्रियजनों का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
बेबस परिवार अब उम्मीद और भरोसे के सहारे अपने लापता सदस्यों की तलाश में जुटे हैं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) द्वारा शुक्रवार को जारी सूची के अनुसार, लापता लोगों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है। इनमें गुजरात के कई एनआरआई भी शामिल हैं।
एसईओसी के एक अधिकारी ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘अभी तक किसी का भी पता नहीं चल पाया है।’’ सनी पारिख ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मेरी मां जीवित हैं, उन्हें बचा लिया गया है और वह सुरक्षित हैं।’’ उनकी मां बीना पारिख अमेरिकी नागरिक हैं और अचानक आई बाढ़ के बाद से लापता हैं। बीना से आखिरी बार 24 अगस्त को संपर्क हुआ था, जब उन्होंने संदेश भेजकर बताया था कि वह काठमांडू पहुंच गई हैं और 25 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना होंगी। सनी ने कहा, ‘‘सब कुछ अनिश्चित लग रहा है।
इस बड़ी आपदा में कई लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, लेकिन मुझे अब भी अच्छे की उम्मीद है।’’ सनी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हम हर जगह से अपनी मां के बारे में पुख्ता जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उनके आईफोन की आखिरी लोकेशन फ्रेंडशिप ब्रिज पर दिखाई दी थी।’’ उन्होंने फोन की आखिरी ज्ञात लोकेशन का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। सनी ने बताया कि उन्होंने ट्रैवल एजेंसी ड्रीम तिब्बत ट्रैवल एंड टूर से भी संपर्क किया है। इसी एजेंसी के माध्यम से उनकी मां समेत 10 अन्य लोग, जिनमें तीन नेपाली और सात एनआरआई शामिल थे, कैलाश मानसरोवर पहुंचने वाले थे।
गांधीनगर निवासी धवल रावल ने बताया कि उनके भाई भाविनकुमार रावल, जो ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं, 26 अगस्त की सुबह से संपर्क में नहीं हैं। धवल ने बताया, ‘‘भाविनकुमार ने आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया में रह रही अपनी पत्नी को संदेश भेजा था कि वह 26 अगस्त को सुबह करीब पांच बजे कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हो रहे हैं।’’ उन्होंने बताया कि भाविनकुमार के दो नाबालिग बेटे हैं, जो अपने पिता के घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। धवल ने कहा, ‘‘घर में सभी लोग चिंतित हैं।
हम बार-बार उन्हें फोन कर रहे हैं और व्हाट्सऐप पर संदेश भेज रहे हैं।’’ उन्होंने बताया कि इस बारे में उच्चायोग और राज्य सरकार को भी जानकारी दी गई है। धवल ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि जल्द ही उनकी खबर मिलेगी।
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