मेरठ लाठीचार्ज मामला: मानवाधिकार आयोग ने यूपी के गृह सचिव और डीजीपी को भेजा नोटिस

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बिना किसी उकसावे के किए गए कथित बर्बर लाठीचार्ज को लेकर राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इस गंभीर मामले में अधिकारियों से 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। यह शिकायत भोपाल निवासी सुनील अहिरवार द्वारा दर्ज कराई गई थी जिसमें पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बिना किसी उकसावे के किए गए कथित बर्बर लाठीचार्ज मामले में कड़ा रुख अपनाया है। इस घटना में कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आने की शिकायत मिलने के बाद आयोग ने राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग के अनुसार शिकायत में लगाए गए आरोप पहली नजर में पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े प्रतीत होते हैं।

मामले की कार्यवाही के मुताबिक आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत इस शिकायत का संज्ञान लिया। 10 जुलाई को जारी इस निर्देश में आयोग के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया गया है कि वे उत्तर प्रदेश के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेजकर 15 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहें।

यह मामला भोपाल के रहने वाले शिकायतकर्ता सुनील अहिरवार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मेरठ में ललिता गौतम हत्या मामले में न्याय दिलाने की मांग को लेकर आयोजित किए गए एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बिना किसी उकसावे के बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया जिससे कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना से जुड़े और व्यापक रूप से प्रसारित वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहले से ही पुलिस हिरासत में ले लिए गए असहाय लोगों को बेरहमी से पीटते दिखाई दे रहे हैं जो सीधे तौर पर हिरासत में यातना देने का मामला है। उन्होंने इसे कानून के शासन के पूरी तरह विफल होने और मानवीय गरिमा के गंभीर उल्लंघन का उदाहरण बताया है।

अपनी शिकायत में सुनील अहिरवार ने आयोग से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से मामले की विस्तृत रिपोर्ट मंगाने स्वतंत्र जांच शुरू करने और वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर जिम्मेदार लोगों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने सभी घायलों को तुरंत चिकित्सा पुनर्वास और कानूनी वित्तीय मुआवजा दिलाने तथा दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जल्द से जल्द आपराधिक और विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है।

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