NIA ने अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों पर UAPA के तहत जांच जारी रखी

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने स्पष्ट किया है कि भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद के आरोप वापस नहीं लिए गए हैं। जांच एजेंसी ने न्यायिक हिरासत के 180 दिन पूरे होने पर वैधानिक जमानत से रोकने के लिए पहले आव्रजन कानून के तहत चार्जशीट दाखिल की है। अधिकारियों के अनुसार अतिरिक्त साक्ष्य मिलने पर यूएपीए के तहत पूरक आरोपपत्र पेश किया जा सकता है।
नयी दिल्ली, नौ सितंबर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने सात विदेशी नागरिकों पर गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत लगाए गए आतंकवाद के आरोप नहीं हटाए हैं और आतंकवाद रोधी कानून के तहत जांच जारी है। सरकारी सूत्रों ने बुधवार को यह बात कही। इन विदेशी लोगों में एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एनआईए ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ आव्रजन एवं विदेशी नागरिक अधिनियम (आईएफए) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया है, क्योंकि अब तक की जांच में इस कानून के तहत अपराध ‘‘पूरी तरह से साबित’’ हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि एजेंसी ने अपने पहले आरोपपत्र में यह भी कहा है कि यूएपीए के तहत जांच जारी है। इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ‘‘कानून आरोपपत्र दाखिल होने के बाद भी आगे जांच करने और पूरक आरोपपत्र दाखिल करने की अनुमति देता है, जब अतिरिक्त सबूतों से अन्य अपराधों का पता चलता है।’’ सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों की न्यायिक हिरासत के 180 दिन 8 सितंबर को पूरे होने वाले थे और अगर आरोपपत्र दाखिल नहीं किया जाता, तो वे अपने आप जमानत के पात्र हो जाते।
उन्होंने कहा कि चूंकि आईएफए के तहत अपराध साबित हो चुके थे, इसलिए एनआईए ने कानूनी ज़मानत की अवधि खत्म होने का इंतज़ार करने के बजाय पहला आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, “...आईएफए आरोपपत्र में यूएपीए के प्रावधान शामिल न होने का मतलब यह नहीं है कि यूएपीए जांच वापस ले ली गई है, छोड़ दी गई है या बंद कर दी गई है।” सूत्रों ने कहा कि हिरासत में लिए गए अपने एक नागरिक का मामला उठाना अमेरिकी राजनयिकों के लिए ‘‘सामान्य राजनयिक प्रक्रिया’’ भी है। उन्होंने कहा कि जब भी किसी भारतीय को विदेश में गिरफ़्तार किया जाता है, तो भारतीय मिशन राजनयिक पहुंच, कानूनी मदद और निष्पक्ष व्यवहार के लिए स्थानीय विदेश कार्यालय तथा अधिकारियों से संपर्क करते हैं; साथ ही, जहां उचित हो, वहां जल्द सुनवाई और सज़ा में छूट की भी मांग करते हैं।
सूत्रों ने कहा कि वियना संधि के तहत हिरासत में लिए गए नागरिकों तक राजनयिक पहुंच को भी विशेष रूप से मान्यता दी गई है। एनआईए ने विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें सात लोगों पर आव्रजन एवं विदेशी नागरिक अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत गैर-कानूनी तरीके से घुसने, रहने और घूमने-फिरने के आरोप लगाए गए हैं। एनआईए ने 13 मार्च को वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों-कामिन्स्की विक्टर, हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन और होंचारुक मक्सिम को गिरफ़्तार किया था।
इन लोगों पर आरोप है कि वे म्यांमा से मिज़ोरम सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुए थे और बाद में देश भर के अलग-अलग घरेलू हवाई अड्डों पर उन्हें पकड़ा गया। आरोप है कि यह समूह भाड़े के लड़ाकों के तौर पर काम कर रहा था। एनआईए ने पूर्व में उनके खिलाफ यूएपीए के प्रावधानों और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
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