केरल में निपाह वायरस का संक्रमण एक बार फिर बढ़ा , 66 लोग हुए संक्रमित

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  सितंबर 7, 2021   22:27
केरल में निपाह वायरस का संक्रमण एक बार फिर बढ़ा , 66 लोग हुए संक्रमित

केरल में निपाह वायरस एक बार फिर अपना सिर उठा रहा है। बीते शनिवार को हुई एक मौत के बाद प्रशाशन सतर्क हो गया है। 2018 में केरल में इसने 45 जाने ली थी। 2021 में निपाह वायरस से ये पहली मौत है।

केरल जो पहले से ही कोरोना महामारी से जूझ रहा है, उसे अब एक नए संक्रमण से दो हाथ करना  पड़ रहा है। दो साल के अंतराल के बाद केरल में, एक बार फिर से निपाह का नया संक्रमण पाया गया है। केरल के कोझिखोड़ जिले में एक 12 वर्षीय ने अपनी जान गवाई है। NIV (National Institute of Virology) ने इसकी पुष्टि की है।

दो वर्ष पूर्व केरल के कोझिकोड जिले से ही निपाह के संक्रमण पाए गए थे, जहाँ पहला संक्रमण पाया गया था। 2018 में आये प्रकोप ने सत्रह लोगों की जानें ली थी। यह संक्रमण जानवरों के माध्यम से फैलता है।  कोझिकोड में पहला संक्रमण एक 27 वर्षीय नवयुवक से फैला था जिसने ये संक्रमण अपने गाँव चांगरोप में चमगादड़-फल से ग्रहण किया था 

हालांकि, विश्व में निपाह का पहला मामला मलेशिया में सन 1998 में रपट हुआ था। निपाह नाम, मलेशिया के उसी जिले से आता है जहाँ पहला संक्रमण दर्ज किया गया था। 

भारत में निपाह संक्रमण का मामला सबसे पहले 2001 में बंगाल के सिल्लीगुड़ी में पाया गया था।  कुल संक्रमित हुए 66 लोगों में से 45 ने अपनी जान गवाई थी। निपाह संक्रमण ने पुनः नाडिआ जिले में दस्तक दी, जहाँ संक्रमित हुए कुल पांच लोगों ने अपनी जान गवाई थी। 

WHO के अनुसार निपाह संक्रमण मूलतः दूषित खाना खाने की वजह से फैलता है।  इसके व्यक्ति से व्यक्ति फैलने का दावा  भी किया गया है। बांग्लादेश में हुए एक अध्ययन में ये बात सामने आई है कि मनुष्य के पानी के छीटों से संक्रमण फैल सकता है।

निपाह वायरस का संक्रमण दर कोरोना से अपेक्षाकृत काम है। माने यह कोरोना से धीमी  गति से फैलता है। हालांकि, निपाह के मृत्यु दर कोरोना से अधिक है। जहाँ  मृत्यु दर एक प्रतिशत के आस पास है, वहीँ निपाह की मृत्यु दर 68  प्रतिशत दर्ज की गयी है। 

 इस संदर्भ में निपाह के लक्षणों से अवगत होना जरूरी है। बुखार, सिरदर्द, मांशपेशियों में दर्द, और उलटी शामिल है। ऐसे व्यक्ति जो निपाह के संक्रमण से संक्रमित  होकर बच गए हैं, उनमें encephalitis हावी रहा है।

निपाह संक्रमण से बचने के लिए अब तक कोई दवाई की खोज नहीं हो पाई है। केरल में 2018 में हुए प्रकोप में अधिकाँश लोगों को चिकित्सीय सुविधा और अवलोकन से ठीक किया गया था।  

केंद्र सरकार द्वारा गठित दल ने सरकार से ये शिफारिश की है कि: 

1. सारे जोखिम वाले संपर्क में आये व्यक्तियों की पहले पहचान की जाए और उनको अलग किया जाए। 

2. पशु चिकित्सा और वन्यजीव विभाग के बीच तालमेल बनाया जाए। 

3. चिकित्सकों का एक दल तैयार किया जाए। 

केरल की सरकार इस निपाह वायरस को गंभीरता से लिया है और इसके लिए वो लगातार कदम उठा रही है।  निपाह के फैलने की दर कोरोना से हम है, थोड़ी सावधानी से इसके प्रकोप को रोका जा सकता है।  





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