Oberoi Hotel से शुरू हुई मोहब्बत, Supreme Court में खत्म हुआ रिश्ता; Omar Abdullah और Payal की Love Story का अंत

हम आपको बता दें कि उमर अब्दुल्ला और पायल नाथ की मुलाकात दिल्ली के प्रतिष्ठित ओबेराय होटल में हुई थी। उस समय उमर होटल समूह में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम कर रहे थे, जबकि पायल भी वहीं कार्यरत थीं।
कभी दिल्ली के एक आलीशान होटल की चमक-दमक के बीच दो युवा दिलों की मुलाकात हुई थी। मुस्कुराहटों से शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती में बदली, दोस्ती ने प्यार का रूप लिया और फिर मजहब की दीवारों को पीछे छोड़ते हुए दोनों ने जिंदगी भर साथ निभाने का फैसला कर लिया। लेकिन हर प्रेम कहानी का अंत सुखद नहीं होता। करीब तीन दशक पहले शुरू हुई जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला (पूर्व में पायल नाथ) की प्रेम कहानी का आखिरी अध्याय आखिरकार सुप्रीम कोर्ट में लिख दिया गया। अदालत ने दोनों की आपसी सहमति से तलाक की अर्जी स्वीकार करते हुए उनके रिश्ते को कानूनी रूप से समाप्त करने का रास्ता साफ कर दिया।
हम आपको बता दें कि उमर अब्दुल्ला और पायल नाथ की मुलाकात दिल्ली के प्रतिष्ठित ओबेराय होटल में हुई थी। उस समय उमर होटल समूह में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम कर रहे थे, जबकि पायल भी वहीं कार्यरत थीं। साथ काम करते-करते दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यह रिश्ता प्यार में बदल गया। एक ओर पायल, सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल रामनाथ की बेटी थीं, तो दूसरी ओर उमर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के बेटे। अलग-अलग पारिवारिक और धार्मिक पृष्ठभूमि के बावजूद दोनों ने अपने रिश्ते को समाज की सीमाओं से ऊपर रखा और 1 सितंबर 1994 को विवाह के बंधन में बंध गए।
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शादी के बाद उनके परिवार में दो बेटों जाहिर और जमीर का जन्म हुआ। बाहर से यह रिश्ता एक आदर्श परिवार की तस्वीर जैसा दिखाई देता था, लेकिन समय के साथ इस रिश्ते की दरारें गहरी होती चली गईं। उमर अब्दुल्ला ने बाद में अदालत में कहा कि वर्ष 2007 के बाद से पति-पत्नी के रूप में उनके बीच कोई वैवाहिक संबंध नहीं रहा और 2009 से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। उनका दावा था कि विवाह पूरी तरह टूट चुका है और पायल के व्यवहार से उन्हें मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
हालांकि कानूनी लड़ाई आसान नहीं रही। उमर ने क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की थी, लेकिन 2016 में फैमिली कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद दिसंबर 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि उमर अपनी पत्नी के खिलाफ क्रूरता या परित्याग के आरोप साबित करने में विफल रहे हैं।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जुलाई 2024 में सर्वोच्च अदालत ने पायल अब्दुल्ला से जवाब मांगा था, क्योंकि उमर ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। इसी बीच दोनों पक्षों ने अदालत के बाहर मध्यस्थता (मेडिएशन) का रास्ता चुना और लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान तलाश लिया।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ को बताया कि दोनों पक्षों ने सभी वैवाहिक विवाद सुलझा लिए हैं और संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने की संयुक्त अर्जी दाखिल की है। सिब्बल ने अदालत से कहा, "दोनों ने अब आजादी को स्वीकार कर लिया है। सभी विवाद सुलझ गए हैं। कृपया तलाक की मंजूरी दे दीजिए।" उन्होंने यह भी बताया कि 22 जुलाई को संयुक्त आवेदन दाखिल किया गया था और समझौते के तहत दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ लंबित सभी मामलों को वापस ले लेंगे।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि वह इस समझौते को अपने आदेश का हिस्सा बनाएगी और उसी के अनुरूप मामला निपटा देगी। अदालत ने संकेत दिया कि औपचारिक आदेश जारी कर विवाह को आपसी सहमति से समाप्त कर दिया जाएगा।
हम आपको बता दें कि इस लंबे कानूनी संघर्ष के दौरान भरण-पोषण का मुद्दा भी अदालतों में पहुंचा। अगस्त 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर अब्दुल्ला को पायल अब्दुल्ला को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में हर महीने 1.5 लाख रुपये देने का निर्देश दिया था। साथ ही दोनों बेटों की शिक्षा के लिए 60-60 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश भी दिया गया था। यह आदेश उस निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आया था, जिसमें पायल को 75 हजार रुपये और प्रत्येक बेटे को 25 हजार रुपये मासिक देने का निर्देश दिया गया था।
देखा जाये तो करीब 32 साल पहले जिस रिश्ते की शुरुआत प्यार, भरोसे और साथ जीने-मरने के वादों से हुई थी, उसका समापन अब अदालत की एक सहमति आधारित कार्यवाही के साथ हो गया। यह सिर्फ एक हाई प्रोफाइल तलाक नहीं, बल्कि उस प्रेम कहानी का अंतिम पन्ना है जिसने कभी मजहब की दीवारें लांघकर नई मिसाल कायम की थी। समय ने आखिरकार उस कहानी को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया, जहां शिकायतों, मुकदमों और वर्षों की दूरी के बाद दोनों ने अलग-अलग राहों पर आगे बढ़ने का फैसला कर लिया। कभी ओबेराय होटल की मुलाकात से शुरू हुआ यह सफर अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साथ हमेशा के लिए खत्म हो गया।
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