शांति, विकास, नगा वार्ता मणिपुर के उखरुल में चुनावी मुद्दे

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 25, 2022   17:44
शांति, विकास, नगा वार्ता मणिपुर के उखरुल में चुनावी मुद्दे

मणिपुर विधानसभा चुनाव में उखरुल के मतदाताओं के लिए शांति, विकास और नगा वार्ता चुनावी मुद्दे हैं। उखरुल में एक मिनी स्टेडियम की उत्तरी छोर की दीवार पर एक भित्तिचित्र सभी को आकर्षित करता है जिसमें नगा विद्रोही नेताओं दिवंगत खोदाओ यंथन, इसाक चिशी स्वू और थुइंगलेंग मुइवा के हाथों में नगा झंडे पकड़े दिखाया गया है।

उखरुल। मणिपुर विधानसभा चुनाव में उखरुल के मतदाताओं के लिए शांति, विकास और नगा वार्ता चुनावी मुद्दे हैं। यहां के लोगों का कहना है कि वे लंबे समय तक शांति और विकास के लिए बेकरार हैं और जब पांच मार्च को दूसरे चरण में मतदान होगा तो वे अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हुए इसे ध्यान में रखेंगे। उखरुल में एक मिनी स्टेडियम की उत्तरी छोर की दीवार पर एक भित्तिचित्र सभी को आकर्षित करता है जिसमें नगा विद्रोही नेताओं दिवंगत खोदाओ यंथन, इसाक चिशी स्वू और थुइंगलेंग मुइवा के हाथों में नगा झंडे पकड़े दिखाया गया है। ऊपर दाएं कोने से एक खंभे से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का झंडा बंधा है और बाईं ओर नगा पीपुल्स फ्रंट का झंडा लगा है। यह पूरा खाका इस छोटे से पर्वतीय शहर में वर्तमान चुनावी मिजाज को दर्शाता है जहां लोग 12वीं मणिपुर विधानसभा में अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए एक उम्मीदवार चुनने की तैयारी में हैं। हालांकि 2015 में हुए रूपरेखा समझौते के तहत केंद्र और एनएससीएन (आईएम) के बीच बातचीत पूरी नहीं हुई है। यह मणिपुर के इस पूर्वोत्तर हिस्से में नगा उग्रवाद के दौरान हिंसा की लोगों को याद दिलाती है। उखरुल के ऐतिहासिक विनो बाजार में किताब की एक दुकान चलाने वाले वर्थेम ने कहा कि यहां के लोग लंबे समय तक शांति और विकास के लिए बेकरार हैं और वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हुए इसे ध्यान में रखेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘हां, एक स्पष्ट परिवर्तन हुआ है और रूपरेखा समझौते की घोषणा के बाद शांति का माहौल है लेकिन अभी भी अतीत की छाया है, अभी भी अनिश्चितता है। क्या होगा यदि नगा लोगों को वह नहीं मिला जो वे मांग रहे हैं?’’ 

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वार्ता समाप्त होने के लंबे इंतजार की छाया अबम चाहोंगहाओ के धैर्य पर स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है जो उखरुल और राज्य की राजधानी इंफाल के बीच निजी यात्री बस सेवा के टिकट बिक्री काउंटर का संचालन करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम उम्मीद कर रहे थे कि यह जल्द ही समाप्त हो जाएगी, लेकिन हम पांच साल से अधिक समय से इंतजार कर रहे हैं और हमें नहीं पता कि यह किस ओर जा रही है।’’ महामारी के दौरान बेंगलुरु में एक नौकरी छोड़कर अपने गृह राज्य लौटे अग्रिप्पा जे. के लिए यह जानने की उत्सुकता है कि रूपरेखा समझौते के तहत क्या सहमति बनी है। उन्होंने कहा, ‘‘आज का युवा विकास और शांति चाहता है। हम उसी के अनुसार मतदान करेंगे, जिसके आधार पर उम्मीदवार हमारी इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं न कि पार्टी के आधार पर। हम इस समझौते का विवरण भी जानना चाहते हैं क्योंकि यह हमारे भविष्य को तय करने में महत्वपूर्ण है।’’ एक निजी एयरलाइन के चालक दल के पूर्व सदस्य सचिनिंग एस डब्ल्यू ने कहा कि क्षेत्र के युवाओं की उनका भविष्य तय करने में बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ हम निश्चित रूप से उस उम्मीदवार को वोट देंगे जो युवाओं का प्रतिनिधित्व कर सके और जो हमारे क्षेत्र की शांति और विकास के लिए काम करेगा।’’ उखरुल विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा कांग्रेस विधायक अल्फ्रेड कन्नगम एस आर्थर, पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉलर एवं भाजपा के सोमाताई सैजा और सेवानिवृत्त आईएएस एवं नगा पीपुल्स फ्रंट के उम्मीदवार राम मुइवा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।





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