प्रभासाक्षी की 18वीं वर्षगाँठ पर भाजपा, कांग्रेस और महाराष्ट्र सूचना केंद्र को मिलेगा विशेष पुरस्कार

  •  नीरज कुमार दुबे
  •  नवंबर 5, 2019   15:36
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प्रभासाक्षी की 18वीं वर्षगाँठ पर भाजपा, कांग्रेस और महाराष्ट्र सूचना केंद्र को मिलेगा विशेष पुरस्कार
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डिजिटल मीडिया पर हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं का प्रभुत्व भले बढ़ा रहा हो लेकिन इस न्यू मीडिया मंच ने पत्रकारिता का जो स्वरूप बदला है और नई चुनौतियाँ आम पाठक, राजनीतिक दलों और सरकारों के समक्ष खड़ी की हैं वह चिंताजनक भी है।

भारत के प्रमुख हिंदी समाचार पोर्टल प्रभासाक्षी की 18वीं वर्षगाँठ पर 'डिजिटल मीडिया पर राष्ट्रभाषा हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की बढ़ती भूमिका' विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन 8 नवम्बर, 2019 को सायं 4 बजे से डिप्टी स्पीकर सभागार, कांस्टीट्यूशन क्लब, नयी दिल्ली में किया जा रहा है। आज के दौर में देखने को मिल रहा है कि डिजिटल मीडिया पर हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं का प्रभुत्व भले बढ़ा रहा हो लेकिन इस न्यू मीडिया मंच ने पत्रकारिता का जो स्वरूप बदला है और नई चुनौतियाँ आम पाठक, राजनीतिक दलों और सरकारों के समक्ष खड़ी की हैं वह चिंताजनक भी है।

कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद, प्रवक्ता, प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं/टीवी चैनलों के संपादकों, वरिष्ठ पत्रकारों तथा पत्रकारिता के छात्रों और समाज के विभिन्न वर्गों से भी लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है।

कार्यक्रम की विशेषताएँ

प्रभासाक्षी ने देशभर में लोकसभा चुनावों की कवरेज के दौरान इस बात की भी पड़ताल की कि किस राजनीतिक दल की कौन-सी प्रदेश इकाई सबसे तीव्र और अलग अंदाज में सोशल मीडिया के जरिये मीडिया को अपडेट्स भेजती है। भारतीय जनता पार्टी की सभी प्रदेश इकाइयों के ग्रुपों में दी जानी वाली जानकारी का विश्लेषण करने पर हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि पश्चिम बंगाल भाजपा इकाई सबसे तीव्र गति से और सबसे अधिक जानकारीपूर्ण अपडेट्स भेजने के मामले में प्रथम स्थान पर है। इसी तरह कांग्रेस के भीतर कर्नाटक इकाई मीडिया अपडेट्स के मामले में शीर्ष पर रही। भाजपा और कांग्रेस की इन इकाईयों के वरिष्ठ नेता पुरस्कार ग्रहण करने पहुँच रहे हैं।

हमने यह भी परखा कि किस प्रदेश का नयी दिल्ली स्थित सूचना केंद्र सर्वाधिक सार्थक और तीव्र गति से मीडिया अपडेट्स भेजता है। इस मामले में दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सूचना केंद्र अग्रणी रहा है। महाराष्ट्र सूचना केंद्र के उप-निदेशक श्री दयानंद काम्बले को कार्यक्रम में सम्मानित किया जायेगा।

इसके अलावा कार्यक्रम में देशभर के 12 उन लेखकों और पत्रकारों को 'हिंदी सेवा सम्मान' से सम्मानित किया जायेगा जोकि सार्थक और तथ्यपरक लेखों के माध्यम से जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमित 19 और लोगों की मौत, 2765 नये मामले

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   19:49
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राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमित 19 और लोगों की मौत, 2765 नये मामले
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राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से 19 और मौत हुई हैं, जिससे इस घातक वायरस से मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2274 हो गयी।

जयपुर। राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के शनिवार को 2765 नये मामले सामने आये। इससे अब तक राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 2,62,805 हो गई है। वहीं, राज्य में संक्रमण से 19 और लोगों की मौत हो गई जिससे राज्य में संक्रमण से कुल मरने वालों का आंकड़ा 2274 तक पहुंच गया। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार शाम छह बजे तक बीते 24 घंटों में राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से 19 और मौत हुई हैं, जिससे इस घातक वायरस से मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2274 हो गयी।

इसे भी पढ़ें: राजस्‍थान के 12 जिलों के 50 नगर निकायों में पार्षद के लिए 10,191 उम्मीदवारों ने भरे पर्चे

कोरोना वायरस संक्रमण से अब तक जयपुर में 428, जोधपुर में 232, अजमेर में 181, बीकानेर में 161, कोटा में 134, भरतपुर में 103, उदयपुर में 92 और पाली में 86 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक कुल 2,31,780 लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। फिलहाल, राज्य में 28,751 रोगी उपचाराधीन हैं। शनिवार को सामने आए नये मामलों में जयपुर में 627, जोधपुर में 449, अजमेर में 115, कोटा में 219, अलवर में 179, उदयपुर में 110, भीलवाड़ा में 108, भरतपुर में 88, नागौर में 92 मामले शामिल हैं।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


किसान आंदोलन को राजनीतिक दल हवा दे रहे है: मनोहर लाल खट्टर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   19:47
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किसान आंदोलन को राजनीतिक दल हवा दे रहे है: मनोहर लाल खट्टर
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हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा, यह बड़ी विचि​त्र स्थिति है कि एक राज्य का मुख्यमंत्री दूसरे राज्य के अपने समकक्ष से बातचीत करना चाहता है, लेकिन कई प्रयासों के बावजूद वह इसमें सफल नहीं हो पाता है। मैं छह साल से मुख्यमंत्री हूं। इससे पहले कभी ऐसी बात नहीं हुयी। हमने विपक्षी नेताओं के साथ भी बातचीत की।

चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को आरोप लगाया कि केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ कुछ राजनीतिक दल एवं संगठन किसान आंदोलन को प्रायोजित कर रहे हैं। खट्टर ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमला बोला और दावा किया वह इस मसले पर उनसे बातचीत करना चाहते थे और तीन दिन तक उनके कार्यालय में टेलीफोन किया लेकिन उन्होंने इसका कोई उत्तर नहीं दिया। इसमें साजिश का दावा करते हुये, खट्टर ने गुरूग्राम में संवाददाताओं से कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री के कार्यालय के अधिकारी पंजाब के प्रदर्शनकारी किसानों को निर्देश दे रहे हैं। उन्होंने कहा इस आंदोलन की शुरूआत पंजाब के किसानों ने की है और कुछ राजनीतिक दल एवं संगठन इसे प्रायोजित कर रहे हैं। खट्टर ने दावा किया कि हरियाणा के किसानों ने इस आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया है। उन्होंने कहा, इसके लिये मैं हरियाणा के किसानों का धन्यवाद करना चाहता हूं।

मुख्यमंत्री ने कहा, मैं हरियाणा पुलिस की भी तारीफ करता हूं कि उन्होंने पिछले दो दिन में, जब से यह मामला (दिल्ली चलो मार्च) शुरू हुआ है, उन्होंने संयम से काम लिया है और बल का इस्तेमाल नहीं किया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग इसमें अपनी राजनीति कर रहे हैं जो बेहद निंदनीय है। यह पूछे जाने पर कि किसानों के मार्च से पहले क्या उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री से बातचीत करने का प्रयास किया, खट्टर ने कहा, मेरे कार्यालय ने मुझे बताया कि उन्होंने छह से सात बार उनसे (कैप्टन अमरिंदर सिंह से) दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया और हर बार उनके कर्मचारियों ने कहा कि हम जल्दी ही संपर्क करेंगे और उस वक्त उन्होंने यह दलील दी कि मुख्यमंत्री बैठकों में और अन्य कार्यों में व्यस्त हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा, यह बड़ी विचि​त्र स्थिति है कि एक राज्य का मुख्यमंत्री दूसरे राज्य के अपने समकक्ष से बातचीत करना चाहता है, लेकिन कई प्रयासों के बावजूद वह इसमें सफल नहीं हो पाता है। मैं छह साल से मुख्यमंत्री हूं। इससे पहले कभी ऐसी बात नहीं हुयी। हमने विपक्षी नेताओं के साथ भी बातचीत की। 

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खट्टर ने कहा, इससे पहले भी मैने पंजाब के मुख्यमंत्री से टेलीफोन पर बातचीत की है, वह भी तब जब वह व्यस्त थे। वह आधे या एक घंटे में वापस कॉल करते थे। इस बार तीन दिन तक उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। साजिश का आरोप लगाते हुये खट्टर ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी प्रदर्शनकारियों को निर्देश दे चुके हैं। एक अन्य सवाल के उत्तर में खट्टर ने जोर देकर कहा कि किसानों को केंद्र सरकार से बातचीत करनी चाहिये। इस बीच हरियाणा के गृह मंत्री ​अनिल विज ने अम्बाला में कहा कि देश के शेष हिस्से में किसान नये कृषि कानूनों को स्वीकार कर चुके हैं लेकिन पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह एवं राजनीतिक कारणों से किसान आंदोलन कर रहे हैं। विज ने उम्मीद जतायी कि किसानों को ब​हुत जल्दी यह महसूस होगा कि ये कानून उनके फायदे के लिये हैं।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


सरकार ने कसी Ola-Uber पर नकेल, नहीं वसूल सकेंगे ज्यादा किराया

  •  अभिनय आकाश
  •  नवंबर 28, 2020   19:37
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सरकार ने कसी Ola-Uber पर नकेल, नहीं वसूल सकेंगे ज्यादा किराया
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ओला उबर सबसे बड़ी कैब एग्रीगेटर कंपनियां हैं। पीक आवर्स में ऐसी कंपनियां किराया कई गुणा बढ़ाकर वसूलती हैं। एग्रीगेटर्स को डेटा स्थानीयकरण सुनिश्चित करना होगा कि डेटा भारतीय सर्वर में न्यूनतम तीन महीने और अधिकतम चार महीने उस तारीख से संग्रहीत किया जाए।

आपको जब सवेरे ऑफिस जाना हो या शाम परिवार के साथ घूमने तभी कैब एग्रीग्रेटर कंपनियां पीक आवर्स के नाम पर मनचाहा किराया वसूलती हैं। लेकिन अब भारत सरकार कैब कंपनियों पर नए नियम लाई है। सरकार का यह कदम अहम हो जाता है, क्योंकि लोग कैब सेवाएं देने वाली कंपनियों के अधिकतम किराये पर लगाम लगाने की लंबे समय से मांग कर रहे थे। 

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बेस फेयर से 50% कम चार्ज करने की अनुमति

ओला ऊबर सबसे बड़ी कैब एग्रीगेटर कंपनियां हैं। पीक आवर्स में ऐसी कंपनियां किराया कई गुणा बढ़ाकर वसूलती हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के द्वारा शुक्रवार को जारी मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2020 के अनुसार, ‘‘एग्रीगेटर कंपनियों को मूल किराये के 50 प्रतिशत तक न्यूनतम किराये और डेढ़ गुने तक अधिकतम किराये वसूलने की मंजूरी दी जाती है।’’ मंत्रालय ने कहा कि यह संसाधनों के इस्तेमाल को सुलभ करेगा और बढ़ावा देगा, जो कि परिवहन एग्रीगेशन के सिद्धांत का मूल है। यह गतिशील किराये के सिद्धांत को प्रमाणिक बनायेगा, जो मांग व आपूर्ति के अनुसार संसाधनों का इस्तेमाल सुनिश्चित करने में प्रासंगिक है। नये दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक सवारी (राइड) पर लागू किराये का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा एग्रीगेटर के साथ जुड़े वाहन के चालक को मिलेगा। शेष हिस्सा एग्रीगेटर कंपनियां रख सकती हैं। मंत्रालय ने कहा कि जिन राज्यों में शहरी टैक्सी का किराया राज्य सरकार ने निर्धारित नहीं किया है, वहां किराया विनियमन के लिये 25-30 रुपये को मूल किराया माना जायेगा। राज्य सरकारें एग्रीगेटर द्वारा जोड़े गये अन्य वाहनों के लिये इसी तरह से किराया निर्धारित कर सकती हैं।

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डेटा की सुरक्षा के लिए बनाया नियम

एग्रीगेटर्स को डेटा स्थानीयकरण सुनिश्चित करना होगा कि डेटा भारतीय सर्वर में न्यूनतम तीन महीने और अधिकतम चार महीने उस तारीख से संग्रहीत किया जाए, जिस दिन डेटा जेनरेट किया गया था। डेटा को भारत सरकार के कानून के अनुसार सुलभ बनाना होगा लेकिन ग्राहकों के डेटा को यूजर्स की सहमति के बिना शेयर नहीं किया जाएगा। कैब एग्रीगेटर्स को एक 24X7 कंट्रोल रूम स्थापित करना होगा और सभी ड्राइवरों को अनिवार्य रूप से हर समय कंट्रोल रूम से जुड़ा होना होगा





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।