Punjab Cabinet ने High Court के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया

पंजाब मंत्रिमंडल ने रविवार शाम एक आपातकालीन बैठक में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की अधिसूचना का विरोध किया है। राज्य सरकार का आरोप है कि केंद्र ने उनकी राय लिए बिना तय प्रक्रिया और संवैधानिक नियमों को दरकिनार किया। मंत्रिमंडल ने इस नियुक्ति और शपथ ग्रहण प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है।
चंडीगढ़, छह सितंबर पंजाब मंत्रिमंडल ने रविवार शाम पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर अश्विनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को अधिसूचित करने के केंद्र सरकार के कदम के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया। मंत्रिमंडल का कहना है कि यह कदम राज्य सरकार की राय का इंतजार किए बिना, संवैधानिक नियमों और तय प्रक्रियाओं को दरकिनार करके उठाया गया। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि राज्य मंत्रिमंडल ने फैसला किया है कि नियुक्ति और शपथ दिलाने की प्रक्रिया को तब तक रोक दिया जाए, जब तक पंजाब सरकार की राय नहीं मिल जाती और उस पर उपयुक्त रूप से विचार नहीं कर लिया जाता।
उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश के लगभग एक महीने बाद, केंद्र सरकार ने शनिवार को न्यायमूर्ति मिश्रा की नियुक्ति की घोषणा कर दी। वह जून से ही यहां उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर काम कर रहे हैं और सोमवार को पंजाब के राज्यपाल उन्हें उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण समारोह से कुछ घंटे पहले, मान सरकार ने केंद्र के फैसले के खिलाफ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मंत्रिमंडल की एक आपातकालीन बैठक बुलाई।
बयान में कहा गया है कि मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार द्वारा राज्य के संवैधानिक अधिकारों और स्थापित प्रक्रिया को ‘‘दरकिनार’’ करने की ‘‘एक और घटना’’ की कड़ी निंदा की। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री भगवंत मान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की संभावना नहीं है; वह पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा से मिलने दिल्ली जा रहे हैं, जो धन शोधन के आरोपों में जेल में बंद हैं। बैठक के बाद एक्स पर पंजाबी में किये गए एक पोस्ट में मान ने कहा, ‘‘आज, पंजाब मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के अधिकारों पर लगातार हो रहे हमलों और संवैधानिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सर्वसम्मति से एक अहम प्रस्ताव पारित किया।’’ उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के नये मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करना, तय प्रक्रियाओं और संवैधानिक नियमों का सीधा उल्लंघन है।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले की प्रक्रिया ज्ञापन के पैरा 6 में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत के प्रधान न्यायाधीश की सिफारिश के बाद, केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री संबंधित राज्य सरकार की राय लेंगे। इसमें कहा गया है, ‘‘राज्य सरकार की राय मिलने के बाद, केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री प्रधानमंत्री को प्रस्ताव सौंपेंगे, जो फिर चयन के बारे में राष्ट्रपति को सलाह देंगे।’’ बयान में कहा गया है, ‘‘यह नियुक्ति राज्य सरकार की सहमति लिए बिना की गई है, जिससे सभी संवैधानिक नियमों और तय प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया है।
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