पंजाब के मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने ज्वालामुखी मंदिर में शीश नवाया

पंजाब के मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने ज्वालामुखी मंदिर में शीश नवाया

पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी सुबह सीधे बगलामुखी से ज्वालामुखी मंदिर पहुंचे। यहां बड़ी तादाद में जुटे श्रद्धालुओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया । चन्नी का मंदिर में प्रवेश करते ही मंदिर के प्रवेश द्वार पर पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों व वैदिक मंत्रोचारण के साथ स्वागत किया गया।

ज्वालामुखी। अपने हिमाचल दौरे पर देवी दर्शनों के लिये आये पंजाब के मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने आज सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी में परिवार सहित पूजा अर्चना की। अपने हिमाचल प्रवास के दौरान उन्होंने इससे पहले बगलामुखी मंदिर में दर्शन किये। इस दौरान मुख्यमंत्री चन्नी की पत्नी कमलजीत कौर व दूसरे परिवारिक सदस्य भी उनके साथ मौजूद रहे।

 

पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी सुबह सीधे बगलामुखी से ज्वालामुखी मंदिर पहुंचे। यहां बड़ी तादाद में जुटे श्रद्धालुओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया । चन्नी का मंदिर में प्रवेश करते ही मंदिर के प्रवेश द्वार पर पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों व वैदिक मंत्रोचारण के साथ स्वागत किया गया।

उन्होंने मंदिर के गृभग्रह में जाकर मुख्य ज्योति के दर्शन कर पूजा अर्चना करते हुये पंजाब व पंजाब के लोगों की भलाई और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। ताकि राज्य के लोग सुखी रहें। सीएम चन्नी की मां ज्वालामुखी के प्रति गहरी आस्था है। चरनजीत सिंह चन्नी ने पहली बार माता ज्वालामुखी के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि मन्दिर में आकर वह दिल से बहुत खुश है।  इस अवसर पर ज्वालामुखी के एसडीएम मनोज ठाकुर ने उन्हें सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया। 

 

ज्वालामुखी धूम्रा देवी धूमावती का स्थान है । व इसे 52 शक्तिपीठों में सर्वोच्च शक्ति सम्पन्न स्थान माना गया है । इस पवित्र स्थल में देवी ज्योति रूप में विराजमान है । तंत्र विद्या में इसे पवित्र एंव प्रचण्ड स्थल माना गया है । शिवालिक पहाडिय़ों के आंचल में यह मंदिर स्थापित है । मंदिर  के गर्भगृह में नौ ज्योतियां जल रही हैं । इनके नाम महाकाली , अन्नपूर्णा , चण्डी, हिंगलाज , विंध्यवासिनी , महालक्ष्मी , सरस्वती , अम्बिका तथा अन्जना हैं ।इनकी श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं । विश्व में शायद यही ऐसा देवालय है जहां प्रतिमा की पूजा नहीं होती । व जल रही ज्योति ही शक्ति का साक्षात स्वरूप है   ।  देश -दुनिया के तीर्थयात्रियों का यह पसंदीदा तीर्थ बन गया है । 





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