Punjab में नशा तस्करी पर सवाल उठाने वाले ग्रामीण की मौत, Harpal Cheema पर FIR की मांग

संगरूर के दिड़बा में वित्त मंत्री से चिट्टे की सप्लाई पर सवाल पूछने वाले ग्रामीण गुलजार सिंह की कथित तौर पर जहर खाने से मौत हो गई। इस घटना के बाद भाजपा और कांग्रेस ने आप सरकार को घेरते हुए मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
चंडीगढ़/नयी दिल्ली, आठ सितंबर पंजाब में मादक पदार्थों की समस्या मंगलवार को उस समय एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने एक ग्रामीण की कथित आत्महत्या को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को घेरा। ग्रामीण ने अपनी मौत से पहले के कथित वीडियो में कहा था कि ‘चिट्टे’ की तस्करी बेरोकटोक जारी है और उसने राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से भी इस मुद्दे पर सवाल किया था। संगरूर जिले के दिड़बा निवासी गुलजार सिंह (47) की सोमवार रात कथित तौर पर जहर खाने के बाद मौत हो गई।
उसके परिवार ने कहा कि गुलजार ने छह सितंबर को दिड़बा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इलाके में मादक पदार्थों की आपूर्ति को लेकर चीमा से सवाल किया था। गुलजार सिंह का मंगलवार शाम अंतिम संस्कार कर दिया गया। गुलजार सिंह के परिवार की शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, पांच लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गुलजार सिंह के आखिरी पलों का एक कथित वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह वित्त मंत्री हरपाल चीमा से अपने क्षेत्र में मादक पदार्थों की उपलब्धता को लेकर सवाल करते दिखाई दे रहा है। वीडियो में वह कथित रूप से कहता है कि उसकी मौत के लिए सरपंच जिम्मेदार होगा। गुलजार ने वीडियो में यह भी स्वीकार किया कि उसका बेटा भी नशा करता है।
गुलजार सिंह का भावुक वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद शिरोमणि अकाली दल (शिअद) समेत विपक्षी दलों ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार को घेरा और हरपाल चीमा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। यह मामला दिल्ली तक पहुंच गया, जहां भाजपा और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा वित्त मंत्री हरपाल चीमा के इस्तीफे की मांग की। दोनों दलों ने आरोप लगाया कि गुलजार सिंह को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया।
आम आदमी पार्टी (आप) ने हालांकि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर आरोप लगाया कि वे राजनीतिक लाभ के लिए एक मौत का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। गुलजार सिंह की मौत ही राज्य में एकमात्र मुद्दा नहीं है। नशे के मुद्दे पर ‘आप’ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने और काले झंडे दिखाने के आरोप में संगरूर के ही एक अन्य ग्रामीण के कथित हिरासत में उत्पीड़न को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा गया।
भाजपा की पंजाब इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर संगरूर के एक ग्रामीण की संदिग्ध आत्महत्या मामले में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करने की मांग की। भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में पार्टी नेताओं सुभाष शर्मा, राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी, परमिंदर सिंह बराड़ और विनीत जोशी ने राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने दोनों मामलों की जांच कराने की मांग की और इन्हें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग की।
पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने नयी दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आत्महत्या के लिए उकसाने के संबंध में मान और चीमा के इस्तीफे की मांग की। भाटिया ने कहा, ‘‘चीमा जब उसके गांव के दौरे पर आए थे तब गुलजार सिंह ने मादक पदार्थों की समस्या का मुद्दा उठाया था। सिंह ने चीमा को बताया कि उसका बेटा ‘चिट्टा’ लेता है और उसने मंत्री से इसकी तस्करी रोकने के लिए कार्रवाई करने का आग्रह किया था।’’ भाजपा नेता ने कहा, ‘‘मंत्री के जाने के बाद गांव का सरपंच एवं ‘आप’ नेता गुलजार सिंह के घर गया और उससे अपनी टिप्पणी के लिए मंत्री से माफी मांगने को कहा।’’ भाजपा प्रवक्ता ने संवाददाता सम्मेलन में एक वीडियो दिखाते हुए कहा कि अस्पताल में मौत से पहले गुलजार सिंह ने पूरा घटनाक्रम बताया था और चीमा के सामने मादक पदार्थों का मुद्दा उठाने पर उसे धमकाने वाले लोगों के नाम भी लिए थे।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि पंजाब में सत्तारूढ़ पार्टी ‘‘गैंगस्टर पार्टी’’ बन गई है। उन्होंने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर, 2016 में नाभा जेल से भागने के मुख्य आरोपियों में से एक गुरप्रीत सिंह सेखों के दो दिन पहले ‘आप’ में शामिल होने की ओर इशारा किया। कांग्रेस ने भी भाजपा के सुर में सुर मिलाते हुए ‘आप’ सरकार को घेरा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि गुलजार सिंह पर सच बोलने के लिए माफी मांगने का दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि मृतक पिता ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनकी मौत के लिए मंत्री चीमा जिम्मेदार हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अगर आप सरकार नशा माफियाओं से नहीं मिली है तो संबंधित मंत्री की तुरंत बर्खास्तगी होनी चाहिए।’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सत्ता के अहंकार में आप नेता भूल गए हैं कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है।
यह शर्मनाक है कि जो सरकार नशे को पूरी तरह खत्म करने के वादे के साथ आई थी, वह आज सवाल पूछने वालों की बलि ले रही है।’’ रमेश ने कुछ दिन पहले पंजाब पुलिस द्वारा एक नौजवान मोहनजीत शेरों को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शेरों ने नशे के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम में विरोध किया था। कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘जनता सब देख रही है।
हर जुल्म और अहंकार का हिसाब देना ही होगा।’’ कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा, “उन्हें (गुलजार सिंह को) इतना अधिक परेशान किया गया और दबाव बनाया गया कि आखिरकार उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया।” कानून-व्यवस्था की कथित बिगड़ती स्थिति और नशे के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन को चंडीगढ़ पुलिस ने रोक दिया। प्रदर्शनकारी जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि गुलजार को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘दिड़बा के गुलजार सिंह ने हरपाल चीमा से मादक पदार्थ की समस्या के बारे में एक सवाल पूछा था, और आरोप है कि उन्हें आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया गया।’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘उन्होंने एक जनसभा में हरपाल चीमा से उनके बेटे की मादक पदार्थ की लत के बारे में सवाल किया था और पूछा था कि इस समस्या को खत्म करने के लिए क्या किया जा रहा है। इसके बाद, उन्हें कथित तौर पर ऐसी हालत में पहुंचा दिया गया कि उन्हें सल्फास (कीटनाशक) खाने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’ ‘आप’ ने कहा कि पंजाब में विपक्षी दल बेहद असंवेदनशील तरीके से राजनीति कर रहे हैं और ये राजनीतिक दल हर घटना को सियासी मुद्दा बनाने में जुट जाते हैं। ‘आप’ की पंजाब इकाई के महासचिव बलतेज पन्नू ने एक वीडियो संदेश में कहा कि पंजाब एक संवेदनशील राज्य है और किसी व्यक्ति की मौत व उसके परिवार के दुख से जुड़े मामलों में राजनीतिक दलों, खासकर विपक्ष से अधिक संवेदनशीलता की उम्मीद की जाती है।
‘आप’ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि जब कोई व्यक्ति किसी मंत्री के पास जाकर अपनी समस्या रखता है तो यह दिखाता है कि उसे उस सरकार पर भरोसा है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग, गुलजार सिंह के परिवार में मातम पसरा है। गुलजार के बेटे लखविंदर सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि जब पुलिस पूछताछ के लिए उनके घर आई थी, तो आरोपियों ने उनके पिता का अपमान किया और उन पर जातिसूचक टिप्पणियां कीं।
प्राथमिकी के मुताबिक, गुलजार के परिवार की शिकायत पर पांच ग्रामीणों -- बलजीत सिंह, सुखदेव सिंह, विक्की सिंह, गोना सिंह और बलजिंदर कौर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी के अनुसार, बलजीत ने सात सितंबर को पंचायत की मौजूदगी में माफी मांगने के लिए गुलजार सिंह को अपने घर बुलाया था। प्राथमिकी में बताया गया कि गुलजार अपमान सहन नहीं कर पाए और उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया।
लखविंदर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी और पुलिस की कार्रवाई से परिवार संतुष्ट है। गुलजार के भतीजे करणवीर सिंह ने बताया कि जब उन्होंने चीमा के सामने यह मुद्दा उठाया, तो गांव के कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें कार्यक्रम स्थल से बाहर ले जाकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया, जिसके बाद उन्होंने जहर खा लिया। करणवीर ने कहा, ‘‘हमें न्याय चाहिए।’’ कथित वीडियो में गुलजार सिंह को चीमा से उनके इलाके में मादक पदार्थ की उपलब्धता के बारे में सवाल करते हुए सुना जा सकता है।
गुलजार को यह कहते हुए सुना गया, ‘‘मेरी मौत के लिए सरपंच जिम्मेदार होंगे। मैंने चिट्टा के बारे में सवाल किया था। मेरा बेटा इसका सेवन करता है।
सब कुछ बिकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘चिट्टा बंद नहीं हुआ है।’’ गुलजार को पहले संगरूर के सिविल अस्पताल ले जाया गया और बाद में पटियाला के राजेंद्र अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें वापस संगरूर लाकर वहां के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, और फिर लुधियाना के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां सोमवार रात उनकी मौत हो गई।
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