Punjab Stubble Burning | पंजाब में पराली जलाने के बढ़ते मामलों पर CAQM सख्त, 12 जिलों के DC और SSP के साथ समीक्षा बैठक

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ANI
रेनू तिवारी । Nov 5 2026 8:20AM

पंजाब में पराली जलाने के अत्यधिक मामलों पर गंभीर रुख अपनाते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के उपायों की समीक्षा के लिए बुधवार को 12 जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब में पराली (धान के अवशेष) जलाने की बढ़ती घटनाओं पर अत्यंत गंभीर रुख अपनाया है। खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने और प्रभावी प्रशासनिक उपाय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में 12 संवेदनशील जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों के सीएक्यूएम अध्यक्ष राजेश वर्मा ने की। 

इसमें राज्य के पर्यावरण सचिव, कृषि सचिव और 12 जिलों के उपायुक्तों (डीसी) तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) ने भाग लिया। सोमवार और मंगलवार के बीच, पंजाब में पराली जलाने के 584 नए मामले सामने आए, जो केवल एक दिन में हुई भारी बढ़ोतरी को दर्शाता है। बैठक में शामिल डीसी और एसएसपी फिरोजपुर, संगरूर, बठिंडा, पटियाला, बरनाला, फरीदकोट, जालंधर, फाजिल्का, लुधियाना, मलेरकोटला, मोगा और मानसा जिलों से थे।

 तकनीकी सदस्य के नेतृत्व में सीएक्यूएम की एक उच्चस्तरीय टीम जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करने के लिए पहले से ही बठिंडा में मौजूद है। आयोग ने निर्देश दिया कि निगरानी और प्रवर्तन अभियान को तेज किया जाए तथा निगरानी में कमी और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में विफलता के लिए नोडल अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए। आयोग ने दोहराया कि किसी भी लापरवाही के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, तीन नवंबर तक पंजाब में पराली जलाने की कुल घटनाएं बढ़कर 2,196 हो गईं, जबकि सोमवार को यह संख्या 1,612 थी।

ज़मीनी स्तर पर निगरानी और नोडल अधिकारियों की जवाबदेही

सीएक्यूएम की एक उच्चस्तरीय तकनीकी टीम जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए पहले से ही बठिंडा में मौजूद है। बैठक के दौरान आयोग ने निम्नलिखित कड़े दिशा-निर्देश जारी किए:

निगरानी एवं प्रवर्तन अभियानों में तेज़ी: सभी 12 जिलों में पुलिस और प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि पराली जलाने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

नोडल अधिकारियों की जवाबदेही: आयोग ने स्पष्ट किया कि फील्ड स्तर पर तैनात नोडल अधिकारियों की यदि निगरानी में ढिलाई या विफलता पाई जाती है, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

लापरवाही पर सख्त कार्रवाई: आयोग ने दोहराया कि निर्देशों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।

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