भारत की विदेश नीति पर राहुल गांधी का 'Hug' वाला तंज, Prabhasakshi ने MEA से पूछा सवाल, मिला ये जवाब

राहुल गांधी के मेलोनी विवाद पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत-इटली संबंध बेहद मजबूत हैं और मित्रता को आदरपूर्ण दायरे में रखना आवश्यक है। यह बयान गांधी द्वारा मोदी की विदेश नीति को केवल नेताओं को गले लगाने तक सीमित बताने और संदीप दीक्षित को गले लगाने के बाद आया, जहाँ दीक्षित ने उन्हें मेलोनी समझकर गले लगाने का सवाल किया था। विदेश मंत्रालय ने द्विपक्षीय संबंधों के महत्व पर जोर देते हुए इस मामले पर अपनी राय रखी।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की विदेश नीति को संभालने के तरीके पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति सिर्फ़ नेताओं को गले लगाने तक ही सीमित है और अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले भी लगाया। हालांकि, दीक्षित के यह पूछने पर कि क्या गांधी ने उन्हें मेलोनी (इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी) समझकर गले लगाया था, एक विवाद खड़ा हो गया; इस पर गांधी ने जवाब दिया, "मैं अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचा हूं।"
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हालांकि, इसको लेकर प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल से सवाल पूछा। इसके जवाब में रणधीर जयसवाल ने कहा कि इटली के साथ हमारे बेहद मजबूत और गहरे संबंध है। हम इस रिश्ते को और मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक दो देशों के बीच रिश्ते और मित्रता की बात है, उसको एक आदरपूर्ण दायरे में रखना जरूरी होता है। रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि मोदी के मन में यह बात बैठ गई है कि विदेश नीति का मतलब नेताओं को गले लगाना है।
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इसके बाद गांधी ने रचनात्मक कांग्रेस के प्रमुख संदीप दीक्षित को गले लगाकर दिखाया कि मौजूदा सरकार के लिए विदेश नीति का क्या मतलब है। उन्होंने कहा, "सोचिए कितनी अज्ञानता है... उन्हें यह ख्याल कहां से आया कि विदेश नीति का मतलब नेताओं को गले लगाना है?" तब दीक्षित ने गांधी से पूछा, "मेलोनी समझकर तो नहीं गले लगाया था?" गांधी ने आगे BJP-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को "जोकरों का झुंड" बताया, जिन्हें भारत की कोई समझ नहीं है।
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