बिहार में RJD को बड़ा झटका! 'मुखिया दीदी' Ritu Jaiswal ने थामा BJP का दामन

लोकप्रिय 'मुखिया दीदी' ऋतु जायसवाल ने आरजेडी छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल मच गई। 2025 विधानसभा चुनाव के टिकट को लेकर आरजेडी नेतृत्व से मतभेद के बाद, उन्होंने पीएम मोदी की समावेशी विकास और अंत्योदय की नीतियों की प्रशंसा की। उनका यह कदम बिहार में दल-बदल की राजनीति और आगामी चुनावों पर गहरा असर डाल सकता है।
बिहार में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की पूर्व नेता ऋतु जायसवाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होकर राज्य के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का संकेत दिया है। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सराओगी ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किया। जायसवाल पूर्व में आरजेडी महिला विंग की अध्यक्ष रह चुकी हैं और उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में आरजेडी के टिकट पर शिवहर से चुनाव लड़ा था। लोकप्रिय रूप से "मुखिया दीदी" के नाम से जानी जाने वाली ऋतु जायसवाल बिहार की राजनीति में पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक थीं।
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आरजेडी नेतृत्व, विशेषकर तेजस्वी यादव के साथ उनके संबंध पिछले कुछ महीनों में कथित तौर पर बिगड़ गए थे। इस मनमुटाव का मुख्य कारण 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में परिहार विधानसभा क्षेत्र से पार्टी टिकट न मिलना था। इस फैसले से नाराज होकर जायसवाल ने पार्टी के खिलाफ बगावत कर स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। हालांकि, उन्हें जीत हासिल करने में सफलता नहीं मिली। आरजेडी ने इसे अनुशासनहीनता का मामला बताते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद, रितु जायसवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा 'राष्ट्र सर्वोपरि' नीति पर काम करती है। जायसवाल ने कहा कि जब मैं केवल एक ही विचारधारा से जुड़ी थी, तो मैं अन्य दृष्टिकोणों को नहीं देख पाती थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग और हर विचारधारा के लोगों के बारे में सोचते हैं। उनकी चिंता यह है कि सभी को मुख्यधारा में कैसे लाया जाए।
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आज सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समाज के सबसे निचले तबके में बैठा व्यक्ति, जिसके लिए अंत्योदय का विचार अभिप्रेत है, वह भी मुख्यधारा का हिस्सा बने। उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी ने इस दिशा में सबसे मजबूत पहल की है, तो वह केंद्र सरकार है, जिसने अपनी कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से यह कदम उठाया है।
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