'भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था', एस जयशंकर बोले- हम तेज़ी से बढ़ रहे हैं आगे

S Jasihankar
ANI
अंकित सिंह । Sep 24, 2022 6:13PM
एस जयशंकर ने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी की मदद से 80 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा के तहत राशन उपलब्ध कराया जा चुका है...भारत 2047 तक एक विकसित देश बनने का लक्ष्य रखता है। हम अपने दूर सदूर के गावों को भी डिजिटाइज करने का लक्ष्य रखते हैं और तेजी से इसपर काम कर रहे हैं।

न्यूयार्क में आयोजित 'भारत @ 75: इंडिया-यूएन पार्टनरशिप इन एक्शन' कार्यक्रम विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने विसकिस भारत की बात कही है। अपने बयान में उन्होंने कहा कि भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। एएनआई के मुताबिक विदेश मंत्री ने कहा कि 18 वीं सदी में भारत विश्व की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग एक चौथाई हिस्सा रखता था। 20 वीं सदी के मध्य तक गुलामी के चलते भारत दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बन गए थे। उन्होंने कहा कि लेकिन आज़ादी के 75 साल बाद भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और हम तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। हमारा विकास डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि कोई भी पीछे न रहे। 

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इसके साथ ही एस जयशंकर ने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी की मदद से 80 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा के तहत राशन उपलब्ध कराया जा चुका है...भारत 2047 तक एक विकसित देश बनने का लक्ष्य रखता है। हम अपने दूर सदूर के गावों को भी डिजिटाइज करने का लक्ष्य रखते हैं और तेजी से इसपर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ग्रह के उज्जवल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमें संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और उसके चार्टर पर पूरा भरोसा है। हमारे विचार में दुनिया आज एक परिवार है। उन्होंने कहा कि 400 मिलियन से अधिक लोगों को नियमित रूप से भोजन मिलता है और हमने 2 बिलियन से अधिक टीके लगाए हैं। 

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विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने वैश्विक जलवायु कार्रवाई के लिए दो प्रमुख पहलों को भी सक्षम किया है, पहला 2015 में फ्रांस के साथ अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन। आज, इसके 100 से अधिक सदस्य हैं। दूसरा आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन है जिसमें भारत संस्थापक सदस्य है। संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि भारत की विकास गाथा को विस्तार की आवश्यकता नहीं है, आज के भारत में हर क्षेत्र में परिवर्तनकारी परिवर्तन हो रहे हैं। हमें अपनी परंपराओं पर गर्व है और हमारे भविष्य पर भरोसा है। 

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