Supreme Court ने निखिल वागले को भेजा अवमानना नोटिस, CJI पर की थी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई सूर्यकांत पर की गई टिप्पणियों के मामले में पत्रकार निखिल वागले और सांसद संजय राउत को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है। एससीबीए की याचिका पर अदालत ने दोनों से पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। हालांकि, पीठ ने फिलहाल उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत को नोटिस जारी किया। यह नोटिस SCBA द्वारा दायर की गई आपराधिक अवमानना याचिका के संबंध में है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के बारे में उनकी टिप्पणियों से जुड़ी है। CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उनसे जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। साथ ही, फिलहाल उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी गई है। जब भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता या किसी अधिकार पर संकट आया है, तो लोग हमेशा मदद के लिए अदालत की शरण में आए हैं। अदालतों ने भी इन अधिकारों की रक्षा करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी है। ऐसे में, अगर वही लोग अदालतों की निंदा करते हैं, आलोचना करते हैं या उन पर तीखे हमले करते हैं, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
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CJI कांत ने टिप्पणी की बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उम्मीद है कि उन्हें सही समझ आएगी। हम बस यही प्रार्थना कर सकते हैं । सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 15 अक्टूबर को निखिल वागले और राउत के खिलाफ आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेंप्ट) की याचिका दायर की। यह मामला CJI सूर्य कांत के बारे में उनकी टिप्पणियों से जुड़ा है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 'कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट' (न्यायालय अवमानना अधिनियम) के तहत इन दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दे दी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले हफ्ते विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने CJI सूर्य कांत से मिलने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। इसके बजाय, उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि वे याचिका दायर करके सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।
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