Satya Niketan Building Collapse: पांचवीं गिरफ्तारी, PG संचालक सुधांशु को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा

दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को इमारत ढहने के मामले में पुलिस ने हॉस्टल डेज़ पीजी के संचालक सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया है। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 5 अन्य घायल हुए थे। मामले में इमारत मालिकों और मरम्मत ठेकेदार सहित अब तक कुल पांच गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
नयी दिल्ली, नौ सितंबर दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को ढह गई इमारत में ‘पेइंग गेस्ट’ (पीजी) का संचालन करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह इस मामले में अब तक हुई पांचवीं गिरफ्तारी है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर को एक इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी। इस इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए पीजी आवास के रूप में किया जा रहा था। इमारत के मलबे से 12 लोगों को निकाला गया था जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई थी और पांच अन्य ज़ख्मी हैं।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीजी संचालक सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। इससे पहले पुलिस ने भवन ढहने के सिलसिले में इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, वायु सेना से सेवानिवृत्त 81 साल के उनके पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता (52) को गिरफ्तार किया था। वहीं, इमारत के तलघर में मरम्मत का काम संभाल रहे ठेकेदार सोनाज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान महेश ने कहा कि वह अपने माता-पिता की ओर से इमारत की रख-रखाव का काम देखता था और परिवार ने अगस्त, 2025 में पीजी संचालक ‘हॉस्टल डेज’ को यह इमारत पट्टे पर दी थी। सूत्रों ने बताया कि सुधांशु हॉस्टल डेज़ पीजी संचालित करने वाले दो कारोबारी साझेदार में से एक है। पुलिस सूत्रों ने कहा कि इमारत के मालिक महेश ने अगस्त 2025 में सुधांशु और उसके कारोबारी साझेदार शुभम त्यागी को संपत्ति पट्टे पर दी थी।
बाद में दोनों ने परिसर को हॉस्टल डेज़ नाम से पेइंग गेस्ट आवास के रूप में संचालित करना शुरू कर दिया। सूत्रों ने बताया कि त्यागी फिलहाल फरार है और उसका पता लगाने के प्रयास जारी हैं। जांचकर्ता किराएदारों के साथ हुए समझौते की जांच कर रहे हैं जिसके तहत पीजी संचालित किया जा रहा था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दस्तावेज़ में लिखा है कि पीजी संचालक किरायेदारों के साथ होने वाली किसी भी जनहानि या खतरे के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। इसमें कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि छात्रावास सीलिंग, आग, भूकंप, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं सहित उसके नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण व्यक्तिगत चोट, हानि या सामान की क्षति के लिए मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। समझौते में कहा गया है कि निर्धारित अवधि से पहले छात्रावास छोड़ने वाले किरायेदार छात्रावास शुल्क या सुरक्षा राशि को वापस पाने के हकदार नहीं होंगे।
इसमें कहा गया है कि पीजी आवास बुक करने के लिए भुगतान की गई पंजीकरण राशि वापस नहीं की जाएगी। समझौते में छात्रावास शुल्क और सुरक्षा राशि वापस नहीं किए जाने से संबंधित प्रावधान भी थे। इसमें संचालकों को अनुशासनहीनता, दुर्व्यवहार, बकाया राशि का भुगतान न करने या अन्य नियमों के उल्लंघन के मामले में किरायेदारों को हॉस्टल से बाहर निकालने का अधिकार दिया गया था।
समझौते के अनुसार, माता-पिता और अभिभावकों को किरायेदारों के कमरे में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया गया था।
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