Satya Niketan PG collapse: दिल्ली पुलिस ने मरम्मत कराने वाले Contractor को कासगंज से पकड़ा

Satya Niketan PG collapse: दिल्ली पुलिस ने मरम्मत कराने वाले Contractor को कासगंज से पकड़ा
प्रतिरूप फोटो
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दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने के मामले में पुलिस ने फरार चल रहे ठेकेदार सनोज को उत्तर प्रदेश से हिरासत में ले लिया है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी जबकि पांच अन्य लोग घायल हुए थे। मामले में पुलिस पहले ही इमारत के तीनों मालिकों को गिरफ्तार कर चुकी है।

नयी दिल्ली, आठ सितंबर दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत में मरम्मत कार्य कराने वाले ठेकेदार को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों ने मं‍गलवार को यह जानकारी दी। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के दक्षिण परिसर के पास स्थित यह पीजी भवन रविवार दोपहर ढह गया था जिससे सात लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य जख्मी हो गए।

पुलिस के मुताबिक, पिछले 8-10 दिनों से बारिश के कारण इमारत के भूमिगत तल में कचरा जमा हो रहा था, इसलिए उसकी सफाई और मरम्मत का काम किया जा रहा था। पुलिस ने बताया कि भूतल पर व्यावसायिक उपयोग के लिए जगह बढ़ाने का काम किया जा रहा था। पुलिस यह काम करा रहे ठेकेदार की तलाश में थी।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ठेकेदार सनोज को कासगंज में पकड़ लिया गया है और उसे दिल्ली लाया जा रहा है। इस मामले में पुलिस इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, वायु सेना से सेवानिवृत्त 81 साल के उनके पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता (52) को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान, महेश ने कहा कि वह अपने माता-पिता की ओर से इमारत के रखरखाव का प्रबंधन करता था और परिवार ने अगस्त, 2025 में पीजी संचालक ‘हॉस्टल डेज’ को यह इमारत पट्टे पर दी थी।

अधिकारी ने बताया कि रविवार को गुप्ता परिवार को स्थानीय लोगों से इमारत ढहने के बारे में पता चला और इसके बाद वे अपना घर छोड़कर राजस्थान के भिवाड़ी में अपने रिश्तेदार के यहां छुप गए थे। इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार रात को गुप्ता दंपति को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, उनके बेटे को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।

इस बीच एक सूत्र ने बताया कि मामले में सहायक उप निरीक्षक प्रफुल्ल टोप्पो की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी के मुताबिक, जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो पूरी इमारत ढह गई थी और कई लोग मलबे में दबे हुए थे। संरचना में एक भूतल और चार ऊपरी मंजिलें थीं जिनमें कई छात्र और अन्य लोग रहते थे।

इसमें कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर पूछताछ से पता चला कि इमारत कई साल पुरानी थी और इसके मालिकों ने कथित तौर पर किराये की आय के लिए मंजिलों का निर्माण किया था। प्राथमिकी में कहा गया है कि नए निर्माण से ढांचे पर दबाव पड़ा। पुलिस ने आरोप लगाया है कि मालिकों को पता था कि मौजूदा इमारत की नींव अतिरिक्त भार सहन नहीं कर सकती है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, दस्तावेज़ में लिखा है कि पीजी संचालक किरायेदारों के साथ होने वाली किसी भी जनहानि या खतरे के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। इसमें कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि छात्रावास सीलिंग, आग, भूकंप, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं सहित उसके नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण व्यक्तिगत चोट, हानि या सामान की क्षति के लिए मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। समझौते में कहा गया है कि निर्धारित अवधि से पहले छात्रावास छोड़ने वाले किरायेदार छात्रावास शुल्क या सुरक्षा राशि को वापस पाने के हकदार नहीं होंगे।

इसमें कहा गया है कि पीजी आवास बुक करने के लिए भुगतान की गई पंजीकरण राशि वापस नहीं की जाएगी। समझौते के अनुसार, माता-पिता और अभिभावकों को किरायेदारों के कमरे में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया गया था।

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