CJI का फोन नहीं उठा सकते? खुद को इतना बड़ा न समझें, SC ने मालदा मामले में बंगाल चीफ सेक्रेटरी को लगाई फटकार

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अभिनय आकाश । Apr 7 2026 12:39PM

न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की, फोन शाम को आते। अगर आपने अपने मोबाइल नंबर साझा किए होते तो मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालय प्रशासन को बहुत मदद मिलती। जब मुख्य सचिव ने कहा कि उनका नंबर उपलब्ध है, तो न्यायमूर्ति बागची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आप इतने ऊंचे पद पर नहीं हो सकते कि मुख्य न्यायाधीश आपसे संपर्क न कर सकें।

पश्चिम बंगाल के मालदा कांड पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि घटना वाले दिन कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन तक नहीं उठाया गया, जो प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा, 'क्या आप चीफ जस्टिस का फोन भी नहीं उठा सकते?' और मुख्य सचिव से इस पर माफी मांगने को कहा। यह मामला 1 अप्रैल को मालदा के कालियाचक में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्यूटी के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को घंटों घेरकर रखने और बंधक बनाने की घटना से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है।

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न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की, फोन शाम को आते। अगर आपने अपने मोबाइल नंबर साझा किए होते तो मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालय प्रशासन को बहुत मदद मिलती। जब मुख्य सचिव ने कहा कि उनका नंबर उपलब्ध है, तो न्यायमूर्ति बागची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आप इतने ऊंचे पद पर नहीं हो सकते कि मुख्य न्यायाधीश आपसे संपर्क न कर सकें। कृपया अपना पद इतना नीचे लाएं कि मुख्य न्यायाधीश भी आपसे संपर्क कर सकें। मुख्य न्यायाधीश ने आगे बढ़कर मुख्य सचिव और डीजीपी दोनों को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से लिखित माफी मांगने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि आपको माफी मांगनी चाहिए; यह आपके नागरिक प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की घोर विफलता है कि हमें न्यायिक अधिकारियों को शक्तियां देनी पड़ीं। पीठ ने गौर किया कि मुख्य सचिव से संपर्क करने के लिए घंटों के प्रयासों के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, जबकि घटना के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया गया था। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, नौकरशाही इसी तरह काम करती है! इस राज्य में अराजकता फैली हुई है।

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स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि घटना दोपहर लगभग 3:30 बजे शुरू हुई, लेकिन उन्हें इसकी सूचना रात 11:30 बजे ही मिली। उन्होंने कहा, तब तक क्या-क्या हो सकता था? हजारों लोगों को इकट्ठा होने और इकट्ठा होते रहने की अनुमति दी गई थी। न्यायमूर्ति बागची ने आगे कहा कि इससे भी गंभीर परिणाम को रोकने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी। अदालत ने घटनास्थल पर पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी के बारे में दिए गए बयानों का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति बागची ने कहा जब रजिस्ट्री ने एसपी से संपर्क किया, तो वे बस देख रहे थे। एसपी ने कहा कि मैं क्या कर सकता हूं, वहां महिलाएं मौजूद हैं - अगर हम कार्रवाई करेंगे तो हम महिलाओं को मार डालेंगे।

आरोपियों से अब एनआईए करेगी पूछताछ

अदालत ने निर्देश दिया कि गिरफ्तार आरोपियों से अब एनआईए पूछताछ करेगी और उनकी हिरासत एजेंसी को सौंपी जाए। राज्य पुलिस को सभी केस डायरी, जांच दस्तावेज और जरूरी लॉजिस्टिक सहायता NIA को सौंपने का निर्देश दिया। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पत्र पर मामले का संज्ञान लिया था।

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