Tata Trusts की विरासत बचाना जरूरी, Tata Sons विवाद पर बोले Sharad Pawar

Sharad Pawar
ANI
अंकित सिंह । Sep 22 2026 2:37PM

एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने टाटा ग्रुप की ट्रस्ट-आधारित विरासत की रक्षा करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। पवार के मुताबिक चेयरमैन पद से जुड़ा विवाद बातचीत और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के नियमों का पालन करके सुलझाया जाना चाहिए।

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने टाटा ग्रुप की ट्रस्ट-आधारित विरासत की रक्षा करने का आह्वान किया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ग्रुप के चैरिटेबल ओनरशिप स्ट्रक्चर और संस्थागत भूमिका को बनाए रखा जाना चाहिए। X पर पोस्ट किए गए एक बयान में पवार ने कहा कि लीडरशिप को लेकर चल रहे विवाद को बातचीत, उचित प्रक्रिया और टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ़ एसोसिएशन' का सख्ती से पालन करते हुए सुलझाया जाना चाहिए।

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पवार ने टाटा ग्रुप को महाराष्ट्र में गहरी जड़ें रखने वाला एक राष्ट्रीय संस्थान बताया। उन्होंने कहा कि इसकी विरासत इस सिद्धांत पर बनी है कि कारोबार से बनाई गई संपत्ति का इस्तेमाल आखिरकार समाज की भलाई के लिए होना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स की संस्थागत भूमिका और गवर्नेंस के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। ये ट्रस्ट मिलकर टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, जो इस ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी है।

उनके ये बयान टाटा संस बोर्ड की 17 सितंबर को हुई बैठक के बाद आए हैं, जिसमें डायरेक्टर्स ने एन. चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर फिर से नियुक्त करने के लिए वोट किया था। चार डायरेक्टर्स ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया। इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने वोट को अमान्य घोषित कर दिया और तर्क दिया कि ऐसे फैसले के लिए उनके नॉमिनी डायरेक्टर्स की मंज़ूरी ज़रूरी थी।

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पवार ने कहा कि शेयरहोल्डर्स द्वारा अपनाए गए नियमों के तहत, ट्रस्ट द्वारा नॉमिनेट किए गए डायरेक्टर्स को चेयरमैन की नियुक्ति समेत अहम मामलों पर 'अफ़र्मेटिव वोटिंग राइट्स' (सहमति देने का अधिकार) मिले हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि लीडरशिप से जुड़े फ़ैसले बहुमत वाले शेयरहोल्डर, यानी टाटा ट्रस्ट्स की सहमति से तय किए जाने चाहिए, न कि उन्हें लंबे समय तक चलने वाले विवादों में बदलने दिया जाए।
 

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