सीतारमण के दैवीय घटना वाले बयान पर सीताराम येचुरी का पलटवार, कहा- राज्य सरकारें क्यों लें कर्ज?

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अगस्त 28, 2020   17:04
सीतारमण के दैवीय घटना वाले बयान पर सीताराम येचुरी का पलटवार, कहा- राज्य सरकारें क्यों लें कर्ज?

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो केन्द्र सरकार कर्ज लेकर राज्यों के बकाए का भुगतान करे। राज्य सरकारें कर्ज क्यों लें?

नयी दिल्ली। माकपा ने जीएसटी राजस्व की कमी के मामले पर शुक्रवार को केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि सरकार उद्योगपतियों से मिलीभगत, नाकाम नीतियों और कठोर रवैये से अर्थव्यवस्था को बर्बाद करके भगवान को कोस रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद की 41वीं बैठक के बाद पत्रकारों से कहा था कि अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुई है, जो कि एक दैवीय घटना है और इससे चालू वित्त वर्ष में इसमें संकुचन आएगा। सीतारमण के बयान पर माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो केन्द्र सरकार कर्ज लेकर राज्यों के बकाए का भुगतान करे। राज्य सरकारें कर्ज क्यों लें? क्या इसे सहकारी संघवाद कहते हैं? भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के बाद राज्यों को लूटा जा रहा है। दैवीय कारण बताकर? 

इसे भी पढ़ें: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं, कोविड-19 दैवीय घटना, अर्थव्यवस्था का घटेगा आकार 

उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों से मिलीभगत, अक्षमता और असंवेदनशीलता की वजह से महामारी से काफी पहले ही लोगों की आजीविकाएं और जिंदगियां बर्बाद हो गई थीं। अब भगवान को कोसा जा रहा है।’’ केंद्र के आकलन के अनुसार चालू वित्त वर्ष में क्षतिपूर्ति के रूप में राज्यों को 3 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इसमें से 65,000 करोड़ रुपये की भरपाई जीएसटी के अंतर्गत लगाये गये उपकर से प्राप्त राशि से होगी। इसीलिए 2.35 लाख करोड़ रुपये का कुल घाटा रहने का अनुमान है। राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा कि इसमें से 97,000 करोड़ रुपये जीएसटी की कमी की वजह से जबकि शेष का कारण कोविड-19 का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव है।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।