न्याय योजना पर बोले समाजवादी नेता रामकिशन , ‘‘हम इस कदम का स्वागत करते हैं

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 29, 2019   18:04
न्याय योजना पर बोले समाजवादी नेता रामकिशन , ‘‘हम इस कदम का स्वागत करते हैं

पंडित रामकिशन समता पार्टी, जनता दल और सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि न्यूनतम आय की बहस नयी नहीं है बल्कि संसद में डॉ राममनोहर लोहिया और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बीच इस पर बहस हुई थी।

जयपुर।वयोवृद्ध समाजवादी नेता पंडित रामकिशन ने कांग्रेस की प्रस्तावित न्यूनतम आय योजना (न्याय) का स्वागत करते हुए कहा है कि इसी तरह अधिकतम खर्च की सीमा भी तय होनी चाहिए ताकि देश में व्यापक आर्थिक विषमता को समाप्त किया जा सके। चार बार विधायक और एक बार सांसद रहे पंडित रामकिशन (93) ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस की ‘न्याय’ योजना का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम इस कदम का स्वागत करते हैं कि न्यूनतम आय की बात कांग्रेस ने स्वीकार की। लेकिन जब तक बड़े लोगों के खर्च पर सीमा नहीं लगेगी, तब तक समाज में व्याप्त विषमता को समाप्त नहीं किया जा सकेगा।'

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पंडित रामकिशन समता पार्टी, जनता दल और सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि न्यूनतम आय की बहस नयी नहीं है बल्कि संसद में डॉ राममनोहर लोहिया और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बीच इस पर बहस हुई थी। लोहिया का कहना था कि देश के 27 करोड़ लोगों की आमदनी तीन आना प्रतिदिन है। पंडित रामकिशन के अनुसार, ‘‘कांग्रेस ने कहा है कि हम 20 फीसदी गरीब परिवारों को सालाना 72000 रुपये तक देंगे जिससे उनकी न्यूनतम आय कम से कम 12000 रुपये महीना हो। 

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अब सवाल है कि अधिकतम आय क्या हो। हम लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि आमदनी नहीं तो कम से कम खर्च की सीमा तो तय हो। हमारी मांग है कि देश में हर नागरिक की न्यूनतम आय की सीमा तय हो और खर्च की भी कोई सीमा हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र प्रणाली में संसद के चुनाव तात्कालिक घटनाओं नहीं बल्कि मौजूदा सरकार के प्रदर्शन पर लड़े जाने चाहिए। उन्होंने कहा, चुनाव इस मुद्दे पर होना चाहिए कि पिछली सरकार ने जो वादे किए, वे वादे पूरे हुए या नहीं हुए। अगर वादे पूरे हुए हैं तो सरकार को फिर मौका देना चाहिए। वादे पूरा नहीं हुए तो सरकार को हटा देना चाहिए। अब एक दो घटनाएं यहां हो गयीं सेना ने कुछ काम किया तो सेना को सलाम। सरकार ने फैसला किया तो उसका स्वागत। लेकिन उसको आधार बनाकर चुनाव क्यों लड़ा जा रहा है।’’





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