6 दिसंबर पर विशेष अयोध्या मंदिर बना इतिहास, अब क्या है मथुरा की बारी

Special Ayodhya temple became history on 6th December
अजय कुमार । Dec 06, 2021 4:11PM
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है जब तक रामलला को नवनिर्मित मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान नहीं करा देंगे तब तक श्री कृष्ण जन्म भूमि के विषय का स्पष्ट नहीं करेंगे।दिसंबर 2023 तक गर्भ ग्रह में रामलला की स्थापना की जाएगी और 2024 में हम कृष्ण जन्म भूमि के बारे में विचार करेंगे।

लखनऊ। अयोध्या बाबरी मस्जिद विध्वंस के 29 साल हो चुके हैं। करीब सवा साल पहले राम जन्मभूमि पर राम मंदिर के लिए भूमि पूजन हो चुका है। 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे को अयोध्या में लाखो कारसेवकों द्वारा गिरा दिया गया था। 27 वर्षों तक हर साल किसी-न-किसी तरह का आयोजन अयोध्या ही नहीं पूरे देश  में किया जाता रहा । लेकिन पिछले  2 साल पूर्व  बाबरी मस्जिद विध्वंस की सालगिरह पर हिंदुओं और मुसलमानों ने किसी भी तरह के आयोजन को न करने का फैसला लिया था जो आज  तक  बदस्तूर जारी  है।देश  की गंगा-जमुनी संस्कृति के लिए अच्छा कदम है। दो संप्रदायों के बीच अयोध्या को लेकर जो विवाद था वह कम हो गया है. बात अयोध्या में  रामलला मंदिर बनवाने के लिए चलाई जा रही मुहिम की अगुवाई कर रहे विश्व हिंदू परिषद की बात की जाए विश्व हिंदू परिषद ने साफ कर दिया है कि अभी वह कृष्ण जन्मभूमि के लिए कोई विचार नहीं कर रहा है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है जब तक रामलला को नवनिर्मित मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान नहीं करा देंगे तब तक श्री कृष्ण जन्म भूमि के विषय का स्पष्ट नहीं करेंगे. दिसंबर 2023 तक गर्भ ग्रह  में रामलला की स्थापना की जाएगी और 2024 में हम कृष्ण जन्म भूमि के बारे में विचार करेंगे।

कौन भूल सकता है 1992 से 2019 तक  इस दिन अयोध्या के मुसलमान काले झंडे दिखाकर अपने प्रतिष्ठानों को बंद  रखते थे और इस दिन को "यम-ए-गम" (दुःख का दिन) या शहादत दिवस के तौर पर मनाया था। वहीं पर हिंदुओं द्वारा यह दिन "शौर्य दिवस" के रूप में मनाया जाता है. अयोध्या पर सियासत कभी खत्म नहीं होती यदि मंदिर बनाने का फैसला कोर्ट की वजह सरकार द्वारा लिया जाता. कोर्ट द्वारा मंदिर निर्माण के फैसले के बाद भगवान राम और बाबरी मस्जिद के नाम पर अपनी दुकानें चलाने वाले कई नेताओं, मौलानाओं और पंडितों की दुकानें बंद हो गई है। अब राजनीतिक दलों के लिए भी आयोध्या चुनाव का मुद्दा नहीं रह गया है। इससे जिसको जितना फायदा था मिल चुका था।

सबसे ज्यादा फायदा भाजपा और समाजवादी तथा राष्ट्रीय जनता दल जैसी क्षेत्रीय पार्टियों ने उठाया, जबकि कांग्रेस को इस विवाद का काफी नुकसान उठाना पड़ा. अयोध्या मामले को लेकर कांग्रेस कभी न्यूट्रल नहीं रही और मजबूती के साथ इसके पक्ष या विपक्ष में भी खड़ी नहीं हो पाई. जिसके चलते एक तरह से तो कांग्रेस की पूरी सियासत की ही खत्म हो गई। यूपी में उसका सफाया हो गया है और केंद्र में सबसे बुरे दौर से गुजर रही है.भारतीय जनता पार्टी ने रामलाल के नाम पर कई चुनाव लड़ और जीत के देख लिये,लेकिन अब जबकि अयोध्या में रामलला के मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो चुका है और अब वहां सियासत चमकाने का कोई मौका नहीं बचा है तो बीजेपी ने अपना फोमस अयोध्या से हटाकर प्रभु श्री कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में केन्द्रित कर लिया है।

बीजेपी 2022 के विधान सभा चुनाव में रामलला की तर्ज पर ही प्रभु श्रीकृष्ण को अपना नया सारथि बनाने जा रही है ? इसका किसी को कोई खास आभास नहीं था. लेकिन डिप्टी सीएम के अब मथुरा वाले एक बयान ने बीजेपी की भविष्य की राजनीति का जैसे खाका ही खींच कर रख दिया है, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के उस बयान के बाद मथुरा पर सियासत तेज हो गई हैं जिसमें उन्होंने कहा था,‘ अब मथुरा की तैयारी है’.मौर्या के इस बयान से विपक्ष बौखला गया है तो बीजेपी मौर्या के बयान के ‘ताप’ को नापने में लगी है.यदि बीजेपी की अपनी हिन्दुत्व वाली सियायत में मौर्या का बयान फिट बैठ गया तो अगले वर्ष होने वाले यूपी विधान सभा चुनाव ही नहीं आगे के भी कई लोकसभा और राज्यों के विधान सभा चुनावों में भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा अयोध्या की तरह गरमाता रहेगा।

दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक पार्टियों ने अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। चुनाव में अयोध्या में मंदिर निर्माण, अब्बाजान, जिन्ना, कलाम,पलायन,मुस्लिम तुष्टिकरण,साम्प्रदायिकता,किसान,गन्ना सबके नाम पर राजनीति हो रही है, तो भला भगवान भी इस चुनाव में ‘उतरे बिना कैसे बच सकते थे। हर बार राम जन्मभूमि मंदिर को मुद्दा बनाने वाली बीजेपी ने अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है,तो इस पर किसी को कोई आश्चर्य नहीं है।बीजेपी आलाकमान ने कभी काशी और मथुरा पर खुलकर कोई बयान नहीं दिया हो,लेकिन अक्सर बीजेपी के नेता और हिन्दूवादी संगठन सार्वजनिक मंचों से ‘अभी मथुरा-काशी बाकी है’ का नारा लगाते रहते हैं।

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