Made in India, दुश्मनों की नजरों से ओझल! Stealth Frigate INS महेंद्रगिरि से बढ़ी नौसेना की ताकत, खूबियां जान लीजिए

कमीशनिंग सेरेमनी से पहले, राजनाथ सिंह शुक्रवार शाम विशाखापत्तनम पहुँचे, जहाँ नेवल स्टाफ़ के चीफ़ एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने उनका स्वागत किया। इससे पहले, रक्षा मंत्री ने इस कमीशनिंग को देश और भारतीय नौसेना के लिए गर्व का पल बताया था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम के नेवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना में INS महेंद्रगिरि को शामिल किया। यह प्रोजेक्ट 17A नीलगिरि-क्लास का छठा स्टील्थ फ्रिगेट है। यह भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम है। इस समारोह में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन भी थे। कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखे गए INS महेंद्रगिरि का नाम पाने वाला यह पहला भारतीय नौसैनिक युद्धपोत है। नौसेना के अनुसार, यह फ्रिगेट मजबूती, ताकत और अटूट संकल्प का प्रतीक है और उम्मीद है कि यह भारत के समुद्री इतिहास में एक खास अध्याय जोड़ेगा।
'आत्मनिर्भर भारत' विज़न का सबूत: राजनाथ
कमीशनिंग सेरेमनी से पहले, राजनाथ सिंह शुक्रवार शाम विशाखापत्तनम पहुँचे, जहाँ नेवल स्टाफ़ के चीफ़ एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने उनका स्वागत किया। इससे पहले, रक्षा मंत्री ने इस कमीशनिंग को देश और भारतीय नौसेना के लिए गर्व का पल बताया था। एक्स पर एक पोस्ट में सिंह ने लिखा, "हमारे देश और भारतीय नौसेना के लिए गर्व के पल का गवाह बनने के लिए विशाखापत्तनम जा रहा हूँ, जहाँ 11 जुलाई 2026 को छठे प्रोजेक्ट 17A स्टील्थ फ्रिगेट, 'महेंद्रगिरि' की कमीशनिंग सेरेमनी होगी। इस युद्धपोत को रक्षा निर्माण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताते हुए सिंह ने कहा, "देश में ही डिज़ाइन और तैयार किया गया यह अत्याधुनिक युद्धपोत हमारे 'आत्मनिर्भर भारत' विज़न और हमारे घरेलू रक्षा उद्योगों व MSME की ज़बरदस्त क्षमताओं का सबूत है। उन्होंने आगे कहा महेंद्रगिरि भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और सुरक्षित इंडो-पैसिफ़िक के लिए हमारे संकल्प को मज़बूत करने के लिए लड़ाई के लिए तैयार है।
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INS महेंद्रगिरि 'आत्मनिर्भर भारत' की सफलता को दर्शाता है
भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा डिज़ाइन किया गया और मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा बनाया गया यह युद्धपोत, प्रोजेक्ट 17A प्रोग्राम के तहत छठा जहाज़ है। यह प्रोजेक्ट स्वदेशी तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं का इस्तेमाल करके एडवांस्ड युद्धपोत डिज़ाइन करने और बनाने में भारत की बढ़ती महारत को दिखाता है। 75 प्रतिशत से ज़्यादा स्वदेशी सामग्री के साथ, INS महेंद्रगिरि सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल की सफलता को दर्शाता है। इस युद्धपोत के निर्माण में भारतीय उद्योगों के एक बड़े नेटवर्क (जिसमें MSME भी शामिल हैं) ने हिस्सा लिया, जिससे घरेलू रक्षा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम मज़बूत हुआ और देश भर में रोज़गार के अवसर पैदा हुए।
INS महेंद्रगिरि का महत्व
यह स्टील्थ फ्रिगेट स्वदेशी हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के एडवांस्ड सेट से लैस है, जिससे यह एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर ऑपरेशन करने में सक्षम है। लड़ाई से जुड़े कामों के अलावा, यह जहाज समुद्री सुरक्षा मिशन, खोज और बचाव अभियान, मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे लंबे समय तक तैनात रहने में भी सक्षम है। INS महेंद्रगिरि के शामिल होने से भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल क्षमताएं काफी बढ़ने की उम्मीद है, साथ ही स्वदेशी युद्धपोत बनाने वाले प्रमुख देश के तौर पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी। जैसे-जैसे और भी प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट बेड़े में शामिल होंगे, उनसे नौसेना की युद्ध की तैयारी और रणनीतिक पहुंच और मजबूत होने की उम्मीद है।
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