Kerala: Suprabhaatham ने की Kanthapuram की तरफदारी, VD Satheesan पर उठाए सवाल

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समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के ईके सुन्नी गुट के मुखपत्र सुप्रभातम ने अपने संपादकीय में नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन के रुख की तीखी आलोचना की है। अखबार ने महिलाओं से जुड़ी टिप्पणी पर एपी सुन्नी गुट के प्रमुख कंथापुरम ए. पी. अबूबकर मुसलियार के विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन किया। इसके साथ ही संपादकीय में सतीशन के 25 वर्षों के विधायी करियर और राजनीतिक रुख पर भी कई सवाल खड़े किए गए हैं।

तिरुवनंतपुरम, छह सितंबर समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के ईके सुन्नी गुट के मुखपत्र ‘सुप्रभातम’ ने एपी सुन्नी गुट के प्रमुख एवं इस्लामी विद्वान कंथापुरम ए. पी. अबूबकर मुसलियार के खिलाफ दिए गए मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन के बयानों की कड़ी आलोचना की है। सुप्रभातम ने अपने संपादकीय में कहा कि सतीशन ने महिलाओं को लेकर कंथापुरम की विवादित टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया कुछ मुस्लिम लोगों द्वारा उन्हें सुनाई गई ‘‘अंधों और हाथी’’ वाली कहानी के अनुभव के आधार पर तैयार की थी। संपादकीय में कहा गया है, ‘‘वे पैगंबर को भी सही तरीके से समझने में विफल रहे, जो ऐसे दौर से मुक्ति दिलाने वाले के रूप में आए थे, जब महिलाओं के साथ गुलामों जैसा व्यवहार किया जाता था और बच्चियों के जन्म लेते ही उन्हें जिंदा दफन कर दिया जाता था।’’ उल्लेखनीय है कि सतीशन ने कंथापुरम की उस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से ‘‘बहुत बड़ा विनाश’’ होगा।

हालांकि, ‘सुप्रभातम’ के संपादकीय में कहा गया कि कंथापुरम को अपने धार्मिक केंद्र में इस तरह के विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता है, ठीक उसी तरह जैसे सतीशन को उनकी आलोचना करने की स्वतंत्रता है। कंथापुरम के लिए समर्थन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह एपी सुन्नी गुट के प्रमुख हैं, जिसके समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के अध्यक्ष जिफरी मुथुकोया थंगल के नेतृत्व वाले ईके सुन्नी गुट से मतभेद हैं। संपादकीय में सतीशन पर व्यापक राजनीतिक हमला भी किया गया है और कई मुद्दों पर उनके रिकॉर्ड एवं रुख पर सवाल उठाए गए।

इसमें सतीशन द्वारा शबरिमला में युवतियों के प्रवेश का विरोध किए जाने का उल्लेख किया गया और इसकी तुलना महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर उनके मौजूदा रुख से की गई। साथ ही मुनंबम वक्फ भूमि विवाद और पीएम श्री योजना को लेकर सतीशन के रुख की भी आलोचना की गई। संपादकीय में कहा गया है कि सतीशन करीब 25 वर्षों से विधायक रहे हैं, लेकिन इस दौरान कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की सरकार के 10 वर्ष तक सत्ता में रहने के बावजूद वह कभी मंत्री नहीं बन पाए।

संपादकीय में सतीशन और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के बीच तुलना भी दिखाई दी। इसमें कहा गया कि सतीशन रोजाना 75 पन्ने पढ़ते हैं, लेकिन उन्होंने कभी कोई उपन्यास नहीं लिखा। इसके विपरीत, मुख्यमंत्री पद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले चेन्निथला ने ‘नियोगम’ (यानी नियति) नाम से एक उपन्यास लिखा है।

संपादकीय में कहा गया है, ‘‘रमेश चेन्निथला ने यह नहीं बताया है कि वह रोज कितने पन्ने पढ़ते हैं लेकिन उन्होंने ‘नियोगम’ नाम का एक उपन्यास जरूर लिखा है।’’ ‘नियोगम’ उपन्यास का जिक्र केवल साहित्यिक संदर्भ नहीं था, बल्कि इसके जरिए संपादकीय ने संभवतः रमेश चेन्निथला की मुख्यमंत्री पद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा की ओर भी इशारा किया।

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