प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नहीं हैं : अदालत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अक्टूबर 13, 2021   05:16
प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश केंद्रशासित प्रदेशों के लिए नहीं हैं : अदालत
प्रतिरूप फोटो

मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि ‘प्रकाश सिंह मामला’ राज्य के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से जुड़ा था, जबकि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, जहां संविधान के अनुच्छेद 239एए के प्रावधानों के अनुरूप विधानसभा की व्यवस्था है।

नयी दिल्ली| दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी राकेश अस्थाना की नियुक्ति को सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करार देने वाली दलीलों को मंगलवार को यह कहते हुए दरकिनार कर दिया कि ‘प्रकाश सिंह मामले’ में शीर्ष अदालत के दिशानिर्देश राज्यों पर लागू होते हैं, न कि राष्ट्रीय राजधानी सहित केंद्र शासित प्रदेशों पर।

याचिकाकर्ता ने अस्थाना की नियुक्ति को इस आधार पर चुनौती दी थी कि यह ‘प्रकाश सिंह’ मामले में शीर्ष अदालत द्वारा पारित निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है, क्योंकि 1984 बैच के इस आईपीएस अधिकारी का न्यूनतम छह महीने का कार्यकाल शेष नहीं था और दिल्ली पुलिस आयुक्त की नियुक्ति के लिए यूपीएससी ने कोई समिति भी गठित नहीं की थी।

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इतना ही नहीं, इस मामले में कम से कम दो साल के कार्यकाल के मानदंडों की भी अनदेखी की गई है। मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने कहा कि ‘प्रकाश सिंह मामला’ राज्य के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से जुड़ा था, जबकि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, जहां संविधान के अनुच्छेद 239एए के प्रावधानों के अनुरूप विधानसभा की व्यवस्था है।

पीठ ने कहा, ‘‘प्रकाश सिंह मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा तीन जुलाई 2018 को जारी आदेश और संबंधित दिशानिर्देशों को पढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि ये दिशानिर्देश संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा सूचीबद्ध किये गये विभाग के तीन वरिष्ठतम अधिकारियों के बीच से राज्य सरकार द्वारा पुलिस महानिदेशक चयनित करने से संबंधित है।’’

न्यायालय ने कहा कि इस फैसले और संबंधित दिशानिर्देशों का एजीएमयूटी काडर के तहत आने वाले केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस आयुक्तों/पुलिस प्रमुखों की नियुक्ति से कोई लेना-देना नहीं है। पीठ ने कहा कि चूंकि संबंधित आदेश एवं दिशानिर्देश राज्यों के पुलिस प्रमुखों से जुड़े हैं, इसलिए इस मामले में शीर्ष अदालत के दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं हुआ है।

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