Supreme Court ने CJI पर सोशल मीडिया पोस्ट मामले में KPCC पदाधिकारियों को भेजा अवमानना नोटिस

Supreme Court ने CJI पर सोशल मीडिया पोस्ट मामले में KPCC पदाधिकारियों को भेजा अवमानना नोटिस
प्रतिरूप फोटो
AI-Generated

प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर की गई एक टिप्पणी को लेकर उच्चतम न्यायालय ने केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता राजनीतिक सुविधा नहीं है और कानून के शासन को कमजोर करने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा। अदालत ने मामले की कानूनी जांच के लिए दो न्याय मित्र भी नियुक्त किए हैं।

नयी दिल्ली, छह नवंबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं है और इसी के साथ उसने प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर की गयी एक पोस्ट को लेकर केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के सभी पदाधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि संविधान सर्वोच्च है और कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक संगठन इससे ऊपर नहीं है। पीठ ने कहा, ‘‘फैसलों की हमेशा आलोचना की जा सकती है।

लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने के लिए डराने-धमकाने का माध्यम नहीं बन सकती। कोई व्यक्ति कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, अदालत के अधिकार को कमजोर करने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। पीठ ने कहा, ‘‘अदालत के अधिकार को किसी राजनीतिक समर्थन की जरूरत नहीं है, बल्कि यह कानून के शासन पर आधारित है।

जहां न्याय प्रशासन की व्यवस्था स्थापित है, वहां कानून को अपना काम करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं है और न्यायिक संयम को कभी भी संस्थागत कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान केपीसीसी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि यह सामग्री पदाधिकारियों की मंजूरी के बिना अपलोड की गई थी और इसे हटा दिया गया है।

उन्होंने अदालत को बताया कि बिना शर्त माफी भी मांगी गई है। न्यायमूर्ति कुमार ने कहा कि अदालत यह परखेगी कि यह माफी ‘‘केवल कागजी है या इसमें वास्तविक पश्चाताप झलकता है।’’ शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि यह परखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और सिद्धार्थ अग्रवाल को न्याय मित्र नियुक्त किया है कि मामले में आपराधिक या दीवानी अवमानना के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं। न्यायालय ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से भी सहायता मांगी है।

कांग्रेस की केरलम इकाई के आधिकारिक ‘एक्स’ खाते से 12 अक्टूबर को सीजेआई के खिलाफ एक पोस्ट की गई थी, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। इस पोस्ट की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हुई थी, जिसके बाद इसे हटा दिया गया। इसके बाद पार्टी ने कहा था कि पोस्ट के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को हटा दिया गया है।

अधिवक्ता विनीत जिंदल द्वारा 13 अक्टूबर को सीजेआई को संबोधित एक शिकायत 30 अक्टूबर को रिट याचिका के तौर पर दर्ज की गई थी।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


All the updates here:

अन्य न्यूज़