नीट प्रदर्शनकारियों पर दर्ज प्राथमिकी रद्द होने पर कॉजपा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बताया बड़ी जीत

उच्चतम न्यायालय ने नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी प्राथमिकी रद्द कर दी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने वालों को राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा नीति बनाने का भी निर्देश दिया है।
नयी दिल्ली, एक सितंबर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को मंगलवार को ‘‘बड़ी जीत’’ बताया। कॉजपा ने कहा कि केंद्र की ओर से तीन महीने के भीतर देशव्यापी मुआवजा नीति बनाने की प्रतिबद्धता अब प्रभावित परिवारों तक राहत के रूप में पहुंचनी चाहिए। कॉजपा ने एक बयान में कहा कि अदालत के आदेश से नीट-यूजी (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल उन प्रदर्शनकारियों को राहत मिली है, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।
उसने कहा कि इसमें अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज मामले भी शामिल हैं। कॉजपा ने कहा कि बाद में यदि केंद्र और राज्यों की ओर से सौंपी गई सूची में कोई अन्य प्राथमिकी छूटी हुई पाई जाती है तो वे भी इस आदेश के दायरे में आएंगी। कॉजपा संस्थापक एवं राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने कहा, ‘‘आज का फैसला हर उस छात्र की जीत है, जिसे यह बताया गया था कि अपनी आवाज उठाना अपराध है।
हमने प्रदर्शन इसलिए किया क्योंकि सरकार सुनने को तैयार नहीं थी। छात्रों को जवाब देने के बजाय सरकार ने प्राथमिकी और पुलिस कार्रवाई का सहारा लिया।’’ उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अब उन लोगों को राहत दी है, जिन्हें ‘‘लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए आपराधिक मामलों में फंसा दिया गया था।’’ दीपके ने कहा कि इस फैसले से यह संदेश जाना चाहिए कि डर दिखाकर असहमति की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों को कक्षाओं में होना चाहिए, थानों में नहीं।
उन्हें अपनी सरकार से जवाबदेही की मांग करने के लिए सड़कों पर नहीं उतरना चाहिए। यह फैसला सत्ता में बैठे लोगों के लिए एक सबक होना चाहिए कि डर के जरिए असहमति को दबाया नहीं जा सकता।’’ कॉजपा ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले से जुड़े कारणों से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता पर उच्चतम न्यायालय द्वारा संज्ञान लिए जाने का भी स्वागत किया। कॉजपा के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि यह प्रतिबद्धता उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जो पहचान, जवाबदेही और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं।
दास ने कहा, ‘‘किसी बच्चे को खोने की भरपाई कोई मुआवजा नहीं कर सकता। इन परिवारों ने जो कुछ झेला है, उसे कोई वापस नहीं बदल सकता। लेकिन सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकती।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के समक्ष की गई प्रतिबद्धता अब ऐसी निष्पक्ष और पारदर्शी नीति में बदलनी चाहिए, जो हर पात्र परिवार तक पहुंचे।’’ दास ने कहा कि परिवार काफी समय से इंतजार कर रहे हैं और उन्हें पहचान तथा राहत के लिए आगे भी संघर्ष नहीं करना चाहिए।
कॉजपा ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के कार्यान्वयन और मुआवजे को लेकर सरकार की तीन महीने की प्रतिबद्धता पर नजर रखेगा। उसने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय में हुई घटनाओं के बाद पांच सितंबर को प्रस्तावित उसका मार्च वापस लिया जा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने देशभर में 20 से 25 जुलाई के बीच कॉजपा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी रद्द कर दी और कहा कि इन मामलों का उनके भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा देने का भी केंद्र को निर्देश दिया। हालांकि, केंद्र के आग्रह को स्वीकार करते हुए अदालत ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नयी प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दी, जिनका गंभीर आपराधिक इतिहास रहा है।
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