Tarun Tejpal को Supreme Court से झटका, 10 साल की सजा निलंबित करने की याचिका खारिज

उच्चतम न्यायालय ने 2013 के दुष्कर्म मामले में तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को मिली 10 वर्ष की जेल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्न बी. वराले की पीठ ने कहा कि इस मामले में सजा निलंबित करने का कोई ठोस आधार नहीं दिखता। वहीं गोवा सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर तेजपाल की सजा को आजीवन कारावास में बदलने का अनुरोध किया है।
नयी दिल्ली, छह नवंबर उच्चतम न्यायालय ने 2013 के एक दुष्कर्म मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल को सुनाई गई 10 साल की सजा निलंबित करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्न बी. वराले की पीठ ने कहा कि वह सजा को निलंबित करने के पक्ष में नहीं है। तेजपाल की सजा निलंबित करने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ‘‘हमें इस मामले में सजा पर रोक लगाने का कोई उचित आधार नजर नहीं आता।’’ तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मामले में साक्ष्यों और अन्य सामग्रियों का हवाला देते हुए दलील दी कि ‘‘पूरी कहानी झूठी है।’’ गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला सजा बढ़ाने का है।
मुंबई उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को अधीनस्थ अदालत के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व संपादक तेजपाल को पांच साल पहले बरी कर दिया गया था। उच्च न्यायालय तेजपाल को दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। तेजपाल को 2013 में गोवा में पत्रिका की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में अपनी एक कनिष्ठ सहयोगी से दुष्कर्म का दोषी ठहराया गया था।
पत्रकार ने दावा किया है कि वह राजनीतिक दुर्भावना के शिकार हुए हैं। तेजपाल ने 20 अगस्त को उच्च न्यायालय के इस फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने 25 अगस्त को तेजपाल को अपनी 10 साल की जेल की सजा काटने के लिए तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था और आत्मसमर्पण से राहत संबंधी उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
इसके बाद तेजपाल ने अधीनस्थ अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था, जिनमें 376(2)(एफ) (विश्वासपात्र या उच्च पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा दुष्कर्म), 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और 354(बी) (महिला का शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग) शामिल हैं। धारा 376(2)(एफ) के तहत अधिकतम सजा आजीवन कारावास है।
गोवा सरकार ने भी तेजपाल की सजा बढ़ाने का अनुरोध करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है और दलील दी है कि यह मामला आजीवन कारावास की सजा का बनता है। गोवा सरकार ने अपनी याचिका में दलील दी कि उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा तेजपाल के अपराधों की प्रकृति और गंभीरता के मद्देनजर बेहद कम है।
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