मेघालय में पति की हत्या की आरोपी सोनम की जमानत के खिलाफ याचिका पर 21 जुलाई को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

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उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि वह मेघालय सरकार की उस याचिका पर 21 जुलाई को सुनवाई करेगा, जिसमें पति की हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई है। सोनम पर साल 2025 में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का गंभीर आरोप है।

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती देने वाली मेघालय सरकार की याचिका पर 21 जुलाई को सुनवाई करेगा। सोनम पर साल 2025 में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या करने का आरोप है।

मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली आरोपी महिला को पिछले साल जून में अपने व्यवसायी पति राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला तब शुरू हुआ जब पिछले साल 23 मई को यह दंपत्ति मेघालय के सोहरा इलाके से लापता हो गया था और बाद में 2 जून 2025 को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई से मिला था। पुलिस का आरोप है कि सोनम रघुवंशी ने पैसों के लालच में भाड़े के हत्यारों के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की साजिश रची थी।

मेघालय सरकार की ओर से दायर यह याचिका मंगलवार को न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। सुनवाई के दौरान मेघालय का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से मामले की सुनवाई दोपहर दो बजे करने का अनुरोध किया था। हालांकि, आरोपी के वकील के आग्रह पर पीठ ने अब मामले की सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय कर दी है।

शीर्ष अदालत ने 9 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में कहा था कि वह इस कानूनी सवाल को एक बड़ी पीठ के पास भेज सकती है कि क्या गिरफ्तारी ज्ञापन में केवल टाइपिंग की गलती की वजह से गलत कानूनी धारा का उल्लेख करना, किसी की गिरफ्तारी को अमान्य करने और आरोपी को जमानत देने का पर्याप्त आधार हो सकता है। अदालत इस बात की बारीकी से जांच करना चाहती है कि क्या उच्च न्यायालय का टाइपिंग त्रुटि के आधार पर रघुवंशी को जमानत देना उचित था।

इससे पहले मेघालय उच्च न्यायालय ने आरोपी को जमानत देने के अधीनस्थ अदालत के आदेश को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट का कहना था कि पुलिस गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार देने में विफल रही और इसे न्यायिक विवेक का पूर्ण अभाव बताया था। दरअसल, गिरफ्तारी ज्ञापन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) (हत्या के लिए दंड) की जगह गलती से धारा 403 लिख दिया गया था। सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी है कि यह त्रुटि पूरी तरह लिपिकीय थी और इतने सनसनीखेज मामले में इसे जमानत का आधार नहीं बनाना चाहिए।

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