मसूद अजहर विवाद के बीच चीन के विदेश मंत्री से मिलेंगी सुषमा स्वराज

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Feb 20 2019 6:10PM
मसूद अजहर विवाद के बीच चीन के विदेश मंत्री से मिलेंगी सुषमा स्वराज
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चीन ने इस घटना पर शोक तो प्रकट किया था लेकिन उसने अजहर को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के कदमों का विरोध करने का अपना रूख दोहराया।

बीजिंग। पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के भारत और अन्य देशों के प्रयासों में चीन के लगातार टांग अड़ाने के बीच विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अगले हफ्ते रूस-भारत-चीन विदेश मंत्री सम्मेलन के मौके पर अपने चीनी समकक्ष वांग यी से भेंटवार्ता करेंगी। यह भेंटवार्ता इस मायने में काफी अहम है कि यह पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच पहला उच्च स्तरीय संवाद होगा। पुलवामा में 14 फरवरी को पाकिस्तान के जैश ए मोहम्मद के आत्मघाती बम हमलावर के हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गये थे।

 
चीन ने इस घटना पर शोक तो प्रकट किया था लेकिन उसने अजहर को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के कदमों का विरोध करने का अपना रूख दोहराया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने बुधवार को घोषणा की कि रूस-भारत-चीन के विदेश मंत्रियों की यह 16 वीं बैठक 27 फरवरी को चीन के पूर्वी झेजियांग प्रांत के वुझेन शहर में होगी। गेंग ने कहा, ‘‘विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान तीनों विदेश मंत्री हमारे नेताओं के बीच के सहमति वाले बिंदुओं के क्रियान्वयन पर बल देंगे और साझा हितों के बड़े अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय मुद्दों एवं त्रिपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।’’
 


 
गेंग ने कहा, ‘‘मुझे पक्का भरोसा है कि इस बैठक के सकारात्मक नतीजे आयेंगे।’’ उन्होंने बताया कि इस बैठक में स्वराज और वांग के अलावा रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी हिस्सा लेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस मौके पर स्वराज और वांग द्विपक्षीय भेंटवार्ता भी करेंगे। उम्मीद है कि इससे दोनों मंत्रियों को अजहर को संरा की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने की भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की कोशिश का समर्थन नहीं करने की चीन की इच्छा पर विस्तार से चर्चा करने का मौका मिलेगा।  पाकिस्तान के मित्र चीन ने 2016 से ही तकनीकी आधार पर इन चार देशों की सभी कोशिशों में अड़ंगा लगा रखा है। वीटो शक्ति संपन्न फ्रांस ने इस बीच घोषणा की है कि वह पुलवामा हमले के आलोक में इस संबंध में नया प्रस्ताव लायेगा।

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