• तेजस्वी का बिहार सरकार पर निशाना, कहा- कुछ लोग विधानसभा को अपनी जागीर समझ रखे हैं

अंकित सिंह Jul 27, 2021 15:43

तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि जहां कुछ लोग विधानसभा को अपनी जागीर समझ रखे हैं, जिन्होंने लोकतंत्र की हत्या की है। जब तक उनपर कार्रवाई नहीं होती और जब तक हमें बहस का मौका नहीं मिलता तब तक पूरे विपक्षी दल के लोग इस सत्र में बहिष्कार करेंगे और सदन नहीं जाएंगे।

बिहार विधानसभा का मानसून सत्र जारी है। विपक्ष लगातार सदन की कार्यवाही के दौरान विधायकों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर कार्रवाई की मांग कर रहा है। विपक्ष का विधानसभा में हंगामा जारी है। इन सब के बीच विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बड़ा ऐलान किया है। तेजस्वी यादव ने साफ तौर पर कह दिया है कि अगर हमारी मांगों पर चर्चा नहीं हुई तो हम लोग सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे। न्यूज़ एजेंसी एनआईए के मुताबिक तेजस्वी यादव ने कहा कि हम सब लोग चाहते हैं कि सदन चले। हमने कल लिखित में भी नियमावली का हवाला देते हुए प्रस्ताव का मौका रखने का मौका मांगा, जो आज सदन में अस्वीकृत किया गया कि आप ऐसे ही बोल लीजिए। विपक्ष के सभी लोग मांग कर रहे हैं कि बहस होनी चाहिए।

तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि जहां कुछ लोग विधानसभा को अपनी जागीर समझ रखे हैं, जिन्होंने लोकतंत्र की हत्या की है। जब तक उनपर कार्रवाई नहीं होती और जब तक हमें बहस का मौका नहीं मिलता तब तक पूरे विपक्षी दल के लोग इस सत्र में बहिष्कार करेंगे और सदन नहीं जाएंगे। इससे पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने सोमवार को आरोप लगाया कि बिहार में निर्वाचित प्रतिनिधियों के सम्मान पर उच्चस्तरीय नौकरशाही हमला कर रही है, जिसे नीतीश कुमार सरकार ने खुली छूट दी हुई है। उन्होंने राजद के नेतृत्व वाले पांच दलों के महागठबंधन के सभी विधायकों की बैठक की अध्यक्षता करने के तुरंत बाद मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा परिसर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए यह बात कही। विपक्ष के नेता ने कहा, यह शर्मनाक है कि भगत सिंह की शहादत के लिए याद की जाने वाली तारीख पर सदन के माननीय सदस्यों को पुलिस कर्मियों ने जूते से मारा और महिला विधायकों को शारीरिक रूप से घसीटा। 

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यादव 23 मार्च की उस घटना का जिक्र कर रहे थे जब विपक्षी विधायकों ने विशेष सशस्त्र पुलिस को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक विधेयक के विरोध में विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा को उनके कक्ष के अंदर बंधक बना लिया था। महागठबंधन ने इसे काला कानून बताया था। जब यह लग रहा था कि मार्शल स्थिति को संभाल नहीं पा रहे तो पुलिस को बुलाया गया और कार्यवाही शुरू होने से पहले अनियंत्रित विधायकों को घसीटकर बाहर कर दिया गया।