सांसदों के निलंबन पर राज्यसभा में हंगामा, विपक्ष ने बताया गैरक़ानूनी और नियमों के खिलाफ

सांसदों के निलंबन पर राज्यसभा में हंगामा, विपक्ष ने बताया गैरक़ानूनी और नियमों के खिलाफ

12 सांसदों के निलंबन पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कल भी हमने उनसे कहा कि आप लोग माफी मांग लीजिए, खेद व्यक्त कीजिए। लेकिन उन्होंने इसे खारिज कर दिया, साफ इनकार किया। इसलिए मज़बूरी में हमें ये फैसला लेना पड़ा। उन्हें सदन में माफी मांगनी चाहिए।

राज्यसभा के 12 सदस्यों के निलंबन को लेकर आज विपक्षी दलों ने खूब हंगामा मचाया। विपक्षी दलों ने पहले तो राज्यसभा में हंगामा किया और फिर सदन से बहिर्गमन कर गए। 12 सदस्यों के निलंबन को लेकर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार बैठक कर रहे हैं। मलिकार्जुन खड़गे ने बताया कि जिन 12 सदस्यों को निलंबित किया गया उन्हें वापस लेने के लिए आज हम अध्यक्ष महोदय से मिले और उनसे आग्रह किया गया। पिछले सत्र में जो घटना हुई थी फिर उसे उठाकर फिर से सदस्यों को निलंबित करना गैरक़ानूनी है और नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था का प्रश्न उठाने वाले सदस्य को अनुमति दिए जाने का नियम है। लेकिन मुझे इसकी अनुमति नहीं दी गई। यह संसदीय परंपरा के खिलाफ है।

वहीं 12 सांसदों के निलंबन पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कल भी हमने उनसे कहा कि आप लोग माफी मांग लीजिए, खेद व्यक्त कीजिए। लेकिन उन्होंने इसे खारिज कर दिया, साफ इनकार किया। इसलिए मज़बूरी में हमें ये फैसला लेना पड़ा। उन्हें सदन में माफी मांगनी चाहिए। वहीं इसके जवाब में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यहां पर ज़मींदारी या राजा नहीं है कि हम बात-बात पर इनके पैर पकड़ें और माफी मांगे। ये ज़बरदस्ती क्यों माफी मंगवाना चाहते हैं। इसे हम बहुमत की बाहुबली कह सकते हैं। ये लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। 

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आपको बतो दें कि संसद के सोमवार को आरंभ हुए शीतकालीन सत्र के पहले दिन कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को पिछले मॉनसून सत्र के दौरान ‘‘अशोभनीय आचरण’’ करने के लिए, वर्तमान सत्र की शेष अवधि तक के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया। उपसभापति हरिवंश की अनुमति से संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस सिलसिले में एक प्रस्ताव रखा, जिसे विपक्षी दलों के हंगामे के बीच सदन ने मंजूरी दे दी। 





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