क्या है नेशनल हेराल्ड मामला? जिसमें राहुल-सोनिया समेत 5 को मिला नोटिस

  •  अभिनय आकाश
  •  फरवरी 22, 2021   20:01
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क्या है नेशनल हेराल्ड मामला? जिसमें राहुल-सोनिया समेत 5 को मिला नोटिस

नेशनल हेराल्ड 1938 में शुरू किया गया एक अखबार था। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसका इस्तेमाल आज़ादी की लड़ाई में किया। पंडित नेहरू ने 1937 में असोसिएटेड जर्नल बनाया था, जिसने तीन अखबार निकालने शुरू किए। हिंदी में नवजीवन, उर्दू में कौमी आवाज़ और अंग्रेज़ी में नेशनल हेराल्ड।

दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मामले में लोअर कोर्ट में सुनवाई पर रोक लगाते हुए सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य से बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर नोटिस भेजकर जवाब मांगा। बता दें कि बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। 

नेशनल हेराल्ड है क्या?

नेशनल हेराल्ड 1938 में शुरू किया गया एक अखबार था। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसका इस्तेमाल आज़ादी की लड़ाई में किया। पंडित नेहरू ने 1937 में असोसिएटेड जर्नल बनाया था, जिसने तीन अखबार निकालने शुरू किए। हिंदी में नवजीवन, उर्दू में कौमी आवाज़ और अंग्रेज़ी में नेशनल हेराल्ड। 2008 आते-आते असोसिएटेड जर्नल ने फैसला किया कि अब अखबार नहीं छापे जाएंगे। बाद में पता चला कि असोसिएटेड जर्नल पर 90 करोड़ रुपयों का कर्ज भी चढ़ चुका है।

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कोर्ट तक पहुंचा मामला

सारा मामला 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाया था। स्वामी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी ने अपने पार्टी के पैसे से सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कंपनी यंग इंडिया को 90 करोड़ रूपए उधार दिए। उस पैसे से राहुल सोनिया की कंपनी यंग इंडिया ने नेशनल हेराल्ड अखबार निकालने वाली कंपनी एसोसिएट जनरल को खरीद लिया और उस कंपनी की करीब 5 हजार करोड़ की संपत्ति गांधी परिवार के पास आज भी मौजूद है।  

अब आगे क्या? 

सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने सोनिया और राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव ऑस्कर फर्नांडिस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडिया से 12 अप्रैल तक स्वामी की याचिका पर जवाब देने को कहा है। 





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


महंगाई के खिलाफ ममता का रोड शो, कहा- बंगाल में तृणमूल रहेगी परिवर्तन तो दिल्ली में होगा

  •  अभिनय आकाश
  •  मार्च 7, 2021   18:16
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महंगाई के खिलाफ ममता का रोड शो, कहा- बंगाल में तृणमूल रहेगी परिवर्तन तो दिल्ली में होगा

ममता की कोशिश ये दिखाने की रही कि केंद्र की बीजेपी सरकार महंगाई पर काबू नहीं कर पा रही है इसलिए लोग एक बार फिर अपनी बेटी को मौका दें। यह रोड शो करीब 4 किलोमीटर लंबा रहा।

पश्चिम बंगाल में राजनीति का सुपर संडे देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी की कोलकाता में रैली जो कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिग्रेड परेड मैदान में हुई। ममता बनर्जी चाहती हैं कि बंगाल के चुनाव में महंगाई मुद्दा बने। इसीलिए एलपीजी सिलेंडर की महंगाई को थीम बनाकर उन्होंने सिलीगुड़ी में रोड शो किया। ममता का ये रोड शो ठीक तभी हो रहा था जब कोलकाता में प्रधानमंत्री रैली कर रहे थे। दरअसल, ममता की कोशिश ये दिखाने की रही  कि केंद्र की बीजेपी सरकार महंगाई पर काबू नहीं कर पा रही है इसलिए लोग एक बार फिर अपनी बेटी को मौका दें। यह रोड शो करीब 4 किलोमीटर लंबा रहा।

इसे भी पढ़ें: शुभेंदु अधिकारी के बयान पर बोले उमर अब्दुल्ला, बंगाल J&K बनेगा तो दिक्कत क्या है?

ममता बनर्जी के सिलेंडर वाले पोस्टर को ही अपना जैकेट बनाकर साड़ी के ऊपर डाल दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में तृणमूल रहेगी परिवर्तन तो दिल्ली में होगा। ममता बनर्जी के पैदल मार्च में बड़ी तादाद में महिलाएं दिखीं। इस दौरान टीएमसी सांसद नुसरत जहां और मिमि चक्रवर्ती भी नजर आईं। ममता ने इस दौरान कहा कि देश में मोदी-शाह का सिंडिकेट है, जो हमसे टकराएगा चूड़-चूड़ हो जाएगा। 






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शुभेंदु अधिकारी के बयान पर बोले उमर अब्दुल्ला, बंगाल J&K बनेगा तो दिक्कत क्या है?

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   17:49
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शुभेंदु अधिकारी के बयान पर बोले उमर अब्दुल्ला, बंगाल J&K बनेगा तो दिक्कत क्या है?

उमर ने ट्वीट किया, “लेकिन आप भाजपा वालों के अनुसार अगस्त 2019 के बाद कश्मीर स्वर्ग बन गया है तो पश्चिम बंगाल के कश्मीर बनने पर क्या आपत्ति है? बंगाली लोग कश्मीर को पसंद करते हैं और बड़ी संख्या में यहां आते हैं।

श्रीनगर। नेशनल कान्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने रविवार को भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के उस बयान की आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में सत्ता में वापस आएगी तो राज्य कश्मीर जैसा बन जाएगा। उमर ने ट्वीट किया, “लेकिन आप भाजपा वालों के अनुसार अगस्त 2019 के बाद कश्मीर स्वर्ग बन गया है तो पश्चिम बंगाल के कश्मीर बनने पर क्या आपत्ति है? बंगाली लोग कश्मीर को पसंद करते हैं और बड़ी संख्या में यहां आते हैं इसलिए हम आपकी मूर्खतापूर्ण टिप्पणी को माफ करते हैं।” शुभेंदु अधिकारी पहले तृणमूल कांग्रेस में थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। इस बार विधानसभा चुनाव में वह नंदीग्राम सीट पर तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ मैदान में हैं।





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ममता ने हेमंत सोरेन से तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार करने का अनुरोध किया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   17:38
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ममता ने हेमंत सोरेन से तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार करने का अनुरोध किया

झारखंड में झामुमो और कांग्रेस की गठबंधन सरकार है और सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के खिलाफ वाम और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ मिलकर गठबंधन किया है।

नयी दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध किया है कि वह उनके लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचार करें और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) भाजपा की चुनावी संभावनाओं को बाधित करने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जल्द ही इस पर निर्णय लेगा। यह बात झामुमो के एक वरिष्ठ नेता ने रविवार को कही। यह घटनाक्रम महत्व रखता है क्योंकि झारखंड में झामुमो और कांग्रेस की गठबंधन सरकार है और सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के खिलाफ वाम और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ मिलकर गठबंधन किया है। राजद, समाजवादी पार्टी और शिवसेना के बाद बनर्जी ने पिछले हफ्ते कहा था कि विधानसभा चुनाव के लिए टीएमसी को झामुमो और राकांपा का समर्थन मिला है। झामुमो के एक वरिष्ठ नेता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ संवाद होता रहता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारी मांग थी कि पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों को झारखंड का हिस्सा बनाया जाना चाहिए था क्योंकि वे राज्य के लिए आंदोलन का हिस्सा थे, लेकिन 2000 में जो सीमा बनाई गई थी, उसमें कुछ क्षेत्रों को छोड़ दिया गया था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘परिणामस्वरूप, आप देखेंगे कि पश्चिम बंगाल के चाय बागानों में, अधिकांश लोग झारखंड के हैं। इसलिए, हमारा वहां प्रभाव है।’’ झामुमो नेता ने कहा कि टीएमसी प्रमुख ने झारखंड के मुख्यमंत्री से उनके लिए प्रचार करने को कहा है। नेता ने कहा कि पार्टी द्वारा जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। नेता ने कहा, ‘‘हालांकि यह लक्ष्य तय है कि भाजपा को वहां पीछे धकेलना है और इस बात को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया जाएगा।’’

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झामुमो नेता ने साथ ही ईंधन की ऊंची कीमतों, कृषि कानून और किसानों के साथ व्यवहार जैसे विभिन्न मुद्दों पर केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया। नेता ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि सहकारी संघवाद केवल नाम का बचा है। गौरतलब है कि राजद के नेता तेजस्वी यादव ने भी बनर्जी की पार्टी को अपना समर्थन दिया था और बिहारियों से चुनाव में बनर्जी का साथ देने की अपील की थी। राजद भी हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार का हिस्सा है। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव 27 मार्च से 29 अप्रैल तक आठ चरणों में होंगे। मतों की गिनती 2 मई को होगी।





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