क्या रूस और यूक्रेन के बीच सुलह करा पाएगा? रूसी विदेश मंत्री इस हफ्ते आ रहे दिल्ली

क्या रूस और यूक्रेन के बीच सुलह करा पाएगा? रूसी विदेश मंत्री इस हफ्ते आ रहे दिल्ली

अमेरिका भारत को क्वाड में देखकर उत्साहित है। वहीं पुतिन की चाहत है कि ब्रिक्स में मोदी और जिनपिंग के साथ खड़े होकर पूरी दुनिया को बताएं कि भारत रूस और चीन एकजुट है।

रूस और यूक्रेन के बीच 1 महीने से भी ज्यादा वक्त से जंग जारी है। दोनों देश अभी भी किसी समझौते की तरफ बढ़ते नजर नहीं आ रहे हैं। रूस और यूक्रेन की इस जंग को लेकर जहां एक तरफ दुनिया दो खेमों में बैठी हुई है, वहीं भारत ने संतुलन बनाने की कोशिश की है। दुनिया में शांति कायम करने के लिए भारत बड़ी भूमिका निभा सकता है। दरअसल रूस और यूक्रेन जंग के बीच ही रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव अचानक भारत आ रहे हैं। माना जा रहा है कि उनके इस भारत दौरे पर युद्धविराम पर कोई ना कोई फार्मूला तैयार किया जा सकता है। रूसी विदेश मंत्री इसी हफ्ते दिल्ली आएंगे, लेकिन वह किस दिन आएंगे यह तय नहीं है। 2 अप्रैल को इजरायली प्रधानमंत्री भी भारत पहुंच रहे हैं। उनकी यात्रा से पहले ही रूसी विदेश मंत्री की यात्रा होगी।

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से वार्ता करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी इजरायल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बैनेट से भी बातचीत करेंगे। इजरायल के प्रधानमंत्री की यात्रा समाप्त होने के बाद मोदी रूसी राष्ट्रपति और यूक्रेन के राष्ट्रपति से भी बातचीत करेंगे। दूसरी ओर नफ्ताली बैनेट भी यही करेंगे। इससे रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध विराम होने की संभावना है।

आपको बता दें भारत इस युद्ध में अपना संतुलित रुख बनाया हुआ है। वह लगातार शांति की बात कह रहा है। भारत संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन के पक्ष में भी वोटिंग से दूर रहा था, और उसने रूस के पक्ष में भी वोटिंग से दूरी बनाई थी। रूस और यूक्रेन भी शांति के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं। रूस और यूक्रेन के युद्ध में भारत और इजरायल की भूमिका मतभेद के अहम पहलुओं को सुलझाने की है।

क्यों है भारत और इजरायल की भूमिका अहम

रूस और भारत के दोस्ताना रिश्ते हैं। वहीं दूसरी ओर अमेरिका से भी उसके रिश्ते अच्छे हैं। अभी जो दुनिया के मौजूदा हालात हैं उसने रूस और अमेरिका दोनों को ही भारत की आवश्यकता है, इसलिए भी इस विवाद को सुलझाने में भारत की भूमिका अहम है। बता दें 25 मार्च को अमेरिका के विदेश उप सचिव विक्टोरिया  नूलैंड भी इसी मकसद से भारत आई थीं।

अमेरिका भारत को क्वाड में देखकर उत्साहित है। वहीं पुतिन की चाहत है कि ब्रिक्स में मोदी और जिनपिंग के साथ खड़े होकर पूरी दुनिया को बताएं कि भारत रूस और चीन एकजुट है।

इजरायल का सबसे नजदीकी दोस्त अमेरिका है। दूसरी ओर यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की यहूदी हैं, जो इजरायल के लिए महत्वपूर्ण हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री इसलिए भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं।

भारत लगातार ये कोशिश कर रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को खत्म किया जा सके। इसीलिए  पिछले 1 महीने में पीएम मोदी ने पुतिन और जेलेंस्की से दो बार लंबी बातचीत की है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों से कई बार बातचीत कर चुके हैं। इमैनुएल मैक्रों प्रिय मोदी से भी बातचीत कर चुके हैं। इन कोशिशों का मकसद यही था कि किसी तरह युद्ध को रोका जाए।





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