ZPM FCRA Bill का संसद में समर्थन नहीं करेगी, यदि Mizoram की चिंताएं दूर न हुईं

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मिजोरम के सत्तारूढ़ दल जोरम पीपुल्स मूवमेंट ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों पर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी का कहना है कि यदि केंद्र सरकार विधेयक में राज्य से जुड़ीं चिंताओं का समाधान नहीं करती है, तो उसके दोनों सांसद संसद में इसका समर्थन नहीं करेंगे। पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति ने मुख्यमंत्री लालदुहोमा के आवास पर हुई बैठक में यह फैसला लिया।

आइजोल, नौ अगस्त मिजोरम की सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) ने रविवार को कहा कि यदि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर राज्य की चिंताओं को दूर नहीं किया तो वह इन संशोधनों का समर्थन नहीं करेगी। जेडपीएम के मीडिया और प्रचार अध्यक्ष बी. लालचांजौवा ने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने प्रस्तावित संशोधनों को लेकर अपना स्पष्ट रुख तय कर लिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) ने पांच अगस्त को मुख्यमंत्री लालदुहोमा के आधिकारिक आवास पर एफसीआरए मुद्दे पर चर्चा की और इस मामले में स्पष्ट निर्णय लिया।

मिजोरम के मंत्री लालचांजौवा ने कहा, “हमारे दोनों सांसद हमारे फैसले को मजबूती से रखेंगे। अगर विधेयक में हमारे रुख को शामिल नहीं किया जाता है तो हम संसद में इसे पारित कराने का समर्थन नहीं करेंगे।” मिजोरम में लोकसभा की एक और राज्यसभा की एक सीट है, दोनों से जेडपीएम के सांसद हैं। जेडपीएम न तो भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा है और न ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन का।

जून में लालदुहोमा ने केंद्र में राजग के साथ औपचारिक गठबंधन की संभावना से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होना न तो पार्टी के एजेंडे में है और न ही कभी रहा है। उन्होंने कहा था कि जेडपीएम केंद्र के साथ अच्छे संबंधों को महत्व देती है, लेकिन राजग के साथ औपचारिक गठबंधन की अभी कोई जरूरत नहीं समझती।

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