भारतीय सिनेमा के एक बड़े स्तंभ थे ऋषिकेश मुखर्जी, स्टारमेकर के रूप में याद किए जाते रहेंगे

Hrishikesh Mukherjee
Prabhasakshi
अंकित सिंह । Sep 30, 2022 12:37PM
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में ऋषिकेश मुखर्जी का अंदाज सबसे जुदा था। उन्होंने हर फिल्म में जीने की फिलॉसफी देने की कोशिश की। अपनी फिल्मों में हंसते-हंसाते जीवन के सच से भी वह रूबरू करा देते थे। कहा जाता है कि ऋषिकेश मुखर्जी फिल्मों की स्क्रिप्ट में डूब जाते थे और तब फिल्मों का निर्माण करते थे।

भले ही हाल के दिनों में भारतीय फिल्मों ने पर्दे पर कुछ खास अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। लेकिन यह बात भी सच है कि भारतीय सिनेमा अपनी बुलंदियों पर पहुंच चुका है। भारतीय सिनेमा ने अपने स्वर्णिम युग को भी देखा है और एक नया इतिहास बनाने के मुहाने पर भी खड़ा है। भारतीय सिनेमा ने कई बड़े बदलाव देखे हैं। इसकी नींव रखने वाले लोगों ने इसको लेकर कई बड़े सपने भी देखे थे। ऐसे ही भारतीय सिनेमा के एक बड़े स्तंभ थे ऋषिकेश मुखर्जी। ऋषिकेश मुखर्जी ने भारतीय सिनेमा में ना सिर्फ ना सिर्फ जान फूंकी बल्कि इसमें कई बड़े बदलाव भी किए। अपने दूरदर्शी सोच की ही वजह से उन्होंने संवेदनशील मसलों पर फिल्म बनाई और लोगों में जागरूकता पैदा करने की कोशिश की। ऋषिकेश मुखर्जी हमारे बीच हमेशा स्टारमेकर के रूप में याद किए जाते रहेंगे। 30 सितंबर 1922 को कोलकाता में जन्मे ऋषिकेश मुखर्जी ने कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा पूरी की। उन्हें विज्ञान और गणित से विशेष लगाव था और यही कारण था कि उन्होंने गणित और विज्ञान के अध्यापक के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। 

ऋषिकेश मुखर्जी कला के प्रति भी काफी आकर्षित थे। यही कारण था कि उन्होंने थिएटर की ओर अपना रुख किया। 40 के दशक में उन्होंने बतौर कैमरामैन अपने सिनेमाई करियर की शुरुआत की।ऋषिकेश मुखर्जी की प्रतिभा को सही आकार देने में प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक विमल राय का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। मुखर्जी ने 1951 में फिल्म 'दो बीघा जमीन' में विमल रॉय के सहायक के रूप में काम किया था। विमल राय के साथ 6 साल तक काम करने के बाद ऋषिकेश मुखर्जी ने 1957 में मुसाफिर फिल्म से अपने निर्देशन कॅरियर की शुरुआत की। फिल्म तो टिकट खिड़की पर असफल साबित हुई पर ऋषिकेश मुखर्जी की प्रतिभा को बल मिलने लगा। 1959 में ऋषिकेश मुखर्जी को राज कपूर के साथ काम करने का मौका मिला फिल्म था। 'अनाड़ी' फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और ऋषिकेश मुखर्जी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े नाम बन गए। 1960 में ऋषिकेश मुखर्जी की एक और फिल्म 'अनुराधा' आई जो भले ही टिकट खिड़की पर असफल साबित हुई लेकिन राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ ही बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में भी इसे सम्मानित किया गया।

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भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में ऋषिकेश मुखर्जी का अंदाज सबसे जुदा था। उन्होंने हर फिल्म में जीने की फिलॉसफी देने की कोशिश की। अपनी फिल्मों में हंसते-हंसाते जीवन के सच से भी वह रूबरू करा देते थे। कहा जाता है कि ऋषिकेश मुखर्जी फिल्मों की स्क्रिप्ट में डूब जाते थे और तब फिल्मों का निर्माण करते थे। यह उनकी सादगी का भी प्रतिनिधित्व करता था। ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फिल्मों के जरिए कई कलाकारों को स्टार बनाया जिसमें धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, अमोल पालेकर व जया भादुड़ी जैसे सितारे शामिल हैं। ऋषिकेश मुखर्जी ने मानवीय पहलुओं पर फिल्म बनाने के साथ-साथ मनोरंजन के पक्ष को भी कभी अनदेखा नहीं किया। यही कारण है कि उनकी फिल्में आज भी लोगों में लोकप्रिय है।

आनंद, गोलमाल, बावर्ची, नमक हराम, अभिमान, बुड्ढा मिल गया, गुड्डी, मिली, सत्य काम, चुपके-चुपके और अनाड़ी ऋषिकेश मुखर्जी की महत्वपूर्ण फिल्में थी। अभिनय ही नहीं बल्कि गानों के फिल्मांकन में भी ऋषिकेश मुखर्जी बेजोड़ थे। उनकी फिल्मों के गाने भी लोगों को खूब पसंद आते थे। हिंदी सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए ऋषिकेश मुखर्जी को कई सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित किया गया। इन महत्वपूर्ण सम्मानों में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण भी शामिल है। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 7 बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। अपनी फिल्मों के जरिए लगभग तीन दशक तक दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने वाले ऋषिकेश मुखर्जी 27 अगस्त 2006 को इस दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन उनकी फिल्में आज भी उन्हें हम सबके बीच लोकप्रिय किए हुए है।

- अंकित सिंह

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