Manna Dey Death Anniversary: सिंगर नहीं पहलवान बनना चाहते थे मन्ना डे, जानें मशहूर गायक के अनोखे किस्से

हिंदी सिनेमा के गायक मन्ना डे का 24 अक्टूबर का निधन हो गया था। उन्होंने कई सदाबहार और यादगार गाने हिंदी सिनेमा को दिए थे। आज भी लोग मन्ना डे के गानों को गुनगुनाना पसंद करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मन्ना डे पहलवान बनना चाहते थे।
आज ही के दिन यानी की 24 अक्टूबर को हिंदी सिनेमा के गायक मन्ना डे का निधन हो गया था। वह शास्त्रीय संगीत की कठिन बंदिशों को सहज बना देते तो कभी हंसते-हंसाते अपने गीतों से श्रोताओं को गुदगुदाने पर मजबूर कर देते थे। उन्होंने कई सदाबहार और यादगार गाने हिंदी सिनेमा को दिए थे। आज भी लोग मन्ना डे के गानों को गुनगुनाना पसंद करते हैं। तो आइए जानते हैं कि उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर गायक मन्ना डे के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
कलकत्ता में 01 मई 1919 को मन्ना डे का जन्म हुआ था। उनका असली नाम प्रबोध चंद्र डे था। उनको बचपन में मुक्केबाजी और कुश्ती का शौक था। वहीं कॉलेज के दिनों में मन्ना डे ने पहलवानी का प्रशिक्षण लिया और ऑल बंगाल कुश्ती प्रतियोगिता के फाइनल तक भी पहुंचे थे। मन्ना डे देश के श्रेष्ठ पहलवानों में शामिल होना चाहते थे। लेकिन उनके इस शौक में कमजोर होती नजर रुकावट बन गई।
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संगीत की शिक्षा
मन्ना डे को संगीत की पहली शिक्षा उनके चाचा कृष्ण चंद्र डे से मिली थी। जोकि एक जाने-माने गायक और संगीतकार थे। इसके बाद मन्ना ने उस्ताद अमान अली खान और उस्ताद अब्दुल रहमान खान जैसे संगीत गुरुओं से संगीत की शिक्षा ली। शास्त्रीय संगीत की गहरी समझ ने मन्ना डे की गायकी और आवाज को खास पहचान दी।
सिंगिंग करियर
साल 1942 में मन्ना डे अपने चाचा के साथ मुंबई आए, यहां पर शुरूआत में उन्होंने अपने चाचा के साथ और बाद में सचिन देव बर्मन के सहायक के रूप में काम किया। फिर साल 1943 में फिल्म 'तमन्ना' से मन्ना डे ने प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की। इसमें मन्ना डे ने सुरैया के साथ मिलकर गीत गाया था।
साल 1950 में आई फिल्म 'मशाल' के गाने 'ऊपर गगन विशाल' से उनको पहचान मिली। इसका संगीत एसडी बर्मन ने तैयार किया था। वहीं दिलचस्प बात यह है कि फिल्म संगीत में सफलता मिलने के बाद मन्ना डे ने शास्त्रीय संगीत सीखना नहीं छोड़ा। वह लगातार रियाज और प्रशिक्षण लेते रहे।
गायकी का अनोखा अंदाज
साल 1968 में फिल्म 'पड़ोसन' का गीत 'एक चतुर नार' हिंदी सिनेमा के सबसे मनोरंजक गीतों में शामिल है। इस गीत में उन्होंने अभिनेता महमूद के रोल के लिए आवाज दी थी। वहीं सुनील दत्त के किरदार के लिए सिंगर किशोर कुमार ने गायन किया था। मन्ना डे की गायकी के बड़े-बड़े गायक भी पसंद करते थे। बताया जाता है कि फेमस गायक मोहम्मद रफी ने एक बाद उनकी तारीफ करते हुए कहा था कि दुनिया को मेरे गाने पसंद हैं और मैं मन्ना डे के गाने सुनता हूं।
मृत्यु
वहीं 24 अक्टूबर 2013 को मन्ना डे ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।
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