Adolf Hitler Death Anniversary: कभी था Time 'Man of the Year', फिर बना सबसे बड़ा तानाशाह, जानें Adolf Hitler की पूरी कहानी

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आज ही के दिन यानी की 30 अप्रैल को तानाशाह अडोल्फ हिटलर ने खुद को गोली मार ली थी। एडोल्फ हिटलर के खाते में दुनिया जर्मनी का चांसलर हिटलर, तानाशाह हिटलर, सेना का मामूली कर्मचारी हिटलर, लाखों मौतों का जिम्मेदार आदि तमाम उपाधियां दर्ज करती है।

द्वितीय विश्व युद्ध के तानाशाह अडोल्फ हिटलर की आज ही के दिन यानी की 30 अप्रैल को मृत्यु हो गई थी। द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की हार से निराश होकर हिटलर ने खुद को गोली मार ली थी। एडोल्फ हिटलर के खाते में दुनिया जर्मनी का चांसलर हिटलर, तानाशाह हिटलर, सेना का मामूली कर्मचारी हिटलर, लाखों मौतों का जिम्मेदार आदि तमाम उपाधियां दर्ज करती है। हिटलर न कोई चुनाव जीता और न कोई बड़ी उपलब्धि हासिल की। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर एडोल्फ हिटलर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

ऑस्ट्रिया में 20 अप्रैल 1889 को एडोल्फ हिटलर का जन्म हुआ था। बचपन में वह कलाकार बनना चाहता था, उसको चित्र बनाना पसंद था। ऐसे में उसने वियना की कला अकादमी में एडमिशन लेने की कोशिश भी की और दो बार असफल रहा। यही असफलता हिटलर के जीवन का बड़ा मोड़ थी। वियना में रहने के दौरान हिटलर की जिंदगी काफी कठिन थी। वह गरीब हो गई थी और उसको कई बार रात सड़कों पर बितानी पड़ी। इस दौरान उसके विचार कठोर होते चले गए और उसने राजनीति और समाज को लेकर अपने नजरिए बनाए।

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जॉइन की नाजी पार्टी

फर्स्ट वर्ल्ड वॉर हिटलर के जीवन में एक नया मोड़ लेकर आया। इस दौरान वह जर्मन सेना में भर्ती हो गया और एक संदेशवाहक के रूप में काम करने लगा। युद्ध के दौरान हिटलर को बहादुरी के लिए सम्मान मिला। लेकिन जर्मनी की हार ने उसको अंदर तक झझकोर दिया था। वह इस हार को स्वीकार नहीं कर सका। युद्ध के बाद जर्मनी में आर्थिक संकट बढ़ने लगा और इसी दौरान हिटलर राजनीति में आया और उसने नाजी पार्टी जॉइन की। हिटलर की बोलने की शैली काफी प्रभावशाली थी और वह भाषण देता और लोग उसकी बातों से धीरे-धीरे प्रभावित होने लगे।

असफल विद्रोह और जेल

साल 1923 में हिटलर ने बीयर हॉल पुट्श नाम से विद्रोह करने की कोशिश की। लेकिन यह प्रयास असफल रहा और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। जेल से बाहर आने के बाद हिटलर ने अपनी रणनीति बदली और उसने यह समझा की सत्ता हासिल करने के लिए उसको चुनाव और कानून का रास्ता पकड़ना होगा। उसकी नाजी पार्टी धीरे-धीरे मजबूत होती गई। साल 1933 में हिटलर जर्मनी का चांसलर बन गया। फिर हिटलर ने तेजी से सत्ता अपने हाथ में ली। इस दौरान उसने विपक्ष को खत्म कर दिया, मीडिया पर कंट्रोल कर लिया और देश में एक तानाशाही स्थापित हो गई।

चांसलर बनने के कुछ समय बाद ही जर्मनी की संसद में आग लग गई थी। इसका फायदा उठाते हुए हिटलर ने आपालकालीन शक्तियां हासिल कर ली थी। इसके बाद हिटलर ने इनेबलिंग एक्ट पारित करवाया। जिसने उसको संसद की मंजूरी के बिना कानून बनाने की ताकत दे दी। इस कानून को बदलकर हिटलर ने लोकतंत्र को खत्म किया और खुद को सर्वोच्च नेता घोषित किया।

मैन ऑफ द ईयर

अपनी छवि को मजबूत करने के लिए हिटलर ने मीडिया का खूब उपयोग किया। जोकि उसकी रणनीति का हिस्सा था। साल 1938 को ऑस्ट्रिया को जर्मनी में मिला लिया। फिर उसने चेकोस्लोवाकिया के हिस्सों पर कब्जा किया। इन घटनाओं ने हिटलर को दुनिया की नजर में एक शक्तिशाली नेता बना दिया। इन्हीं वजहों से हिटलर को 'मैन ऑफ द ईयर' चुना गया। इस दौरान तक हिटलर की पहचान एक क्रूर तानाशाह की बन चुकी थी। हिटलर के शासन के परिणाम बहुत भयानक थे। फिर सेकेंड वर्ल्ड वॉर शुरू हुई और लाखों लोगों की जान गई। जोकि इतिहास का एक काला अध्याय है।

मृत्यु

वहीं जब जर्मनी हार के करीब था, तो हिटलर से यह बर्दाश्त नहीं हुई। इस कारण 30 अप्रैल 1945 को हिटलर ने बर्लिन में अपने बंकर में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस दौरान उसकी पत्नी ईवा ब्राउन भी थी।

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